भारत सहित वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के चलते, ईरान के खाड़ी देशों पर जवाबी हमलों ने पश्चिम एशिया में अशांति फैला दी है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कई देशों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कमी देखने को मिल रही है। इस संघर्ष के कारण ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
ईरान के गैस उत्पादन क्षेत्रों पर हमलों और कतर की एलएनजी उत्पादन सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में रुकावट की संभावना बढ़ी है।
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी नीचे बंद हुए। यूरोप के बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई। अमेरिकी बाजार में भी गिरावट का सामना करना पड़ा। इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है। फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'अनिश्चितता' शब्द का कई बार उल्लेख किया, जिससे टैरिफ और ऊर्जा संकट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ने का संकेत मिला।
वैश्विक धारणा ने भारतीय शेयर बाजार को भी प्रभावित किया। गुरुवार को, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2,496.89 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ। यह जून 2024 के बाद की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट है। दिन के दौरान, यह 2,753.18 अंक या 3.58 प्रतिशत गिरकर 73,950.95 पर पहुंच गया।
50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 775.65 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 23,002.15 पर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में इटरनल, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फिनसर्व प्रमुख रूप से पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए इस्तीफे के बाद बैंक के शेयरों में 5.13 प्रतिशत की गिरावट आई।