होर्मूज स्ट्रेट से करीब 2000 किमी दूर होने के बावजूद, गुजरात के मोरबी की टाइल इंडस्ट्री पर इसका असर साफ दिख रहा है. गैस सप्लाई में कटौती के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन रुक गया है या बहुत कम हो गया है.
कंपनियां बढ़ा रही हैं कीमतAsian Granito और NITCO जैसी बड़ी कंपनियों ने बढ़ती फ्यूल लागत से निपटने के लिए 5% तक फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है. एशियन ग्रैनिटो के मुताबिक, कंपनी 31 मार्च तक ज्यादातर बढ़ी हुई लागत खुद झेलेगी, लेकिन 18 मार्च से 5% फ्यूल सरचार्ज लागू कर दिया गया है.
उत्पादन पर सीधा असरटाइल इंडस्ट्री में गैस सबसे जरूरी इनपुट है, खासकर भट्ठियों (kilns) के लिए. गैस की कमी से उत्पादन चक्र प्रभावित हो रहा है और लागत भी बढ़ रही है. NITCO का कहना है कि इससे मुनाफे (मार्जिन) पर दबाव आएगा और काम की टाइमिंग भी बिगड़ सकती है.
कुछ कंपनियां कम प्रभावितKerakoll जैसी कंपनियों ने बताया कि वे सिर्फ नेचुरल गैस पर निर्भर नहीं हैं, इसलिए उनका उत्पादन अभी सामान्य है. वे वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
एक्सपोर्ट पर भी असरCRISIL के मुताबिक, भारत की ₹53,000 करोड़ की टाइल इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है. FY26 में कुल रेवेन्यू 12% और एक्सपोर्ट 67% तक घट सकता है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और शिपिंग रूट्स में बाधा के कारण डिलीवरी में देरी और लागत बढ़ गई है. करीब 40% कमाई एक्सपोर्ट से आती है, जिसमें 15% हिस्सा मिडिल ईस्ट का है.
बढ़ी शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागतफ्रेट कॉस्ट 4550% और इंश्योरेंस 2530% तक बढ़ गई है, जिससे कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है. इसके साथ ही फैक्ट्रियां बंद होने से फिक्स्ड कॉस्ट भी झेलनी पड़ रही है.
आगे क्या?अगर यह संकट लंबा चला, तो कंपनियों की कमाई हर महीने 78% तक गिर सकती है और मुनाफा भी कम हो सकता है.
बड़े खिलाड़ी बेहतर स्थिति मेंबड़ी कंपनियां जैसे Kajaria Ceramics और Somany Ceramics कई तरह के ईंधन (LPG, LNG, कोयला आदि) का इस्तेमाल करती हैं और उनके प्लांट देश के अलग-अलग हिस्सों में हैं, इसलिए वे इस संकट से बेहतर तरीके से निपट पा रही हैं. गैस सप्लाई संकट ने मोरबी की टाइल इंडस्ट्री को झटका दिया है. छोटे यूनिट्स ज्यादा प्रभावित हैं, जबकि बड़ी कंपनियां अभी संभली हुई हैं. अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं और इंडस्ट्री पर दबाव जारी रहेगा.