मिडिल ईस्ट में चल रहा ईरान-इजराइल संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. पहले जहां यह जंग सिर्फ सैन्य ताकत और रणनीति तक सीमित थी, अब इसका असर सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. तेल और गैस जैसी जरूरी ऊर्जा संसाधन, जो कभी सुरक्षित माने जाते थे, अब युद्ध का हिस्सा बन गए हैं. इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. जो ईरान और मिडिल ईस्ट गैस फील्ड था अब वह पूरी तरीके से बैटलफील्ड में बदल गया है, जिसकी जद में भारत भी आ रहा है.
हालात तब और बिगड़ गए जब इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट साउथ पार्स पर हमला किया. यह गैसफील्ड ईरान की ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ माना जाता है. इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों के कई ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया. कतर के रास लाफान जैसे बड़े गैस प्रोसेसिंग हब को नुकसान पहुंचा, वहीं यूएई और सऊदी अरब को भी खतरे का सामना करना पड़ा. कुवैत की रिफाइनरी में आग लगने और सऊदी के यनबू पोर्ट पर हमले ने साफ कर दिया कि अब इस इलाके में कोई भी ऊर्जा ठिकाना सुरक्षित नहीं है.
तेल-गैस बाजार में भूचालइस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. वहीं यूरोप में गैस की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है. सबसे बड़ी चिंता कतर को लेकर है, जो दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में से एक है. अगर वहां से सप्लाई प्रभावित होती है, तो पूरी दुनिया में गैस की कमी हो सकती है. इसके अलावा, होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाली लगभग 20% वैश्विक तेल और गैस सप्लाई भी खतरे में है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है.
यूरोप पर सीधा असरइस संकट का असर यूरोप में साफ दिख रहा है. इटली, हंगरी और रोमानिया जैसे देशों में बिजली की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इन देशों की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा गैस पर निर्भर है, इसलिए जैसे ही गैस महंगी हुई, बिजली भी महंगी हो गई. यूरोप की समस्या यह है कि उसके पास गैस के सीमित विकल्प हैं. ऐसे में मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने से वहां की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
भारत की स्थिति भी चिंताजनकभारत भी इस संकट से अछूता नहीं है. देश अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल, 50% गैस और 60% LPG आयात करता है. इसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. इस समय कई भारतीय जहाज, जो तेल और गैस लेकर आ रहे थे, होर्मुज के पास फंसे हुए हैं. इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है. भारत ने कुछ हद तक रूस और अन्य देशों से तेल खरीदकर स्थिति संभालने की कोशिश की है, लेकिन गैस और LPG की कमी को पूरा करना आसान नहीं है.
शेयर मार्केट का हुआ बुरा हालमिडिल ईस्ट में जल रही आग की आंच भारत तक भी पहुंच रही है. तनाव के माहौल में गुरुवार को HDFC के चेयरमैन ने आए अचानक इस्तीफे ने उस आग में घी डालने का काम किया. ग्लोबल टेंशन और एचडीएफसी से जुड़ी खबर ने शेयर बाजार को झकझोर दिया. इंडियन मार्केट गुरुवार को एक ही दिन में करीब 2600 अंक तक नीचे चला गया, जो कि 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट रही. इस गिरावट में निवेशकों के एक ही दिन में 13 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए.
सोने चांदी में भी आई गिरावटवहीं, फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले से कमोडिटी बाजार दबाव में आ गया. गुरुवार शाम करीब 7 बजे तक वायदा बाजार पर गोल्ड और सिल्वर क्रैश हो गए. सोना करीब 5 फीसदी टूटकर करीब 144000 हजार प्रति 10 ग्राम पर आ गया. वहीं, चांदी का हाल भी गुरुवार को बेहाल ही रहा. चांदी कारोबार के समय करीब 13 फीसदी तक टूट गई थी. सिल्वर में 32 हजार रुपये की गिरावट आई थी.
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