लाखों नहीं, करोड़ों भी नहीं… गोरखपुर में 1 अरब का ऑनलाइन स्कैम, होटल में सीक्रेट मीटिंग के दौरान 4 जालसाज गिरफ्तार
TV9 Bharatvarsh March 22, 2026 02:42 PM

उत्तर प्रदेश की रामगढ़ताल थाना पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके कारनामे सुनकर अधिकारी भी दंग रह गए. यह गिरोह ऑनलाइन निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर अब तक करीब 1 अरब (100 करोड़) रुपये की हेराफेरी कर चुका है. पुलिस ने गोरखपुर के एक नामचीन होटल में छापेमारी कर गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो वहां नए शिकार फंसाने की योजना बना रहे थे.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने फर्जी और किराए के बैंक खातों के जरिए लगभग एक अरब रुपये का लेनदेन किया है. ठगी गई इस भारी-भरकम रकम को आरोपी क्रिप्टो करेंसी में इन्वेस्ट कर देते थे. गिरोह का मास्टरमाइंड लोगों को घर बैठे मोटा मुनाफा कमाने और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश का लालच देकर उनके साथ ठगी करता था.

होटल में चल रही थी ठगी की क्लास

20 मार्च को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि रामगढ़ताल स्थित एक होटल में कुछ लोग फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर मीटिंग कर रहे हैं. पुलिस ने जब वहां दबिश दी, तो अजीत यादव (अंबेडकर नगर), अजय कुमार (कुशीनगर), पारतेश सिंह (बलिया) और गणेश साहनी (कुशीनगर) को रंगे हाथों दबोच लिया. अभी इनका एक साथी ऋषभ (शाहजहांपुर) फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है.

कैसे देते थे वारदात को अंजाम?

सीओ अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, यह गिरोह किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था. निवेशकों को मुनाफे के झूठे आंकड़े दिखाकर और अधिक पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था. जब निवेशक अपना पैसा वापस मांगते, तो आरोपी उनसे संपर्क तोड़ लेते थे. एक खाता फ्रीज होने पर ये लोग भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर नया खाता खुलवाते और उसकी यूजर आईडी व पासवर्ड खुद इस्तेमाल करते थे.

बरामदगी और पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें लैपटॉप और कई स्मार्टफोन, बैंक खातों से जुड़े फर्जी दस्तावेज, विभिन्न बैंक खातों के यूजर आईडी और पासवर्ड की लिस्ट शामिल है.

साइबर सेल अब इन खातों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हैं. पुलिस को अंदेशा है कि ठगी का यह आंकड़ा एक अरब से भी ऊपर जा सकता है.

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