Chaitra Navratri 2026 5th Day: स्कंदमाता की पूजा के समय अवश्य पढ़ें ये कथा, खुशियों से भर जाएगी झोली
TV9 Bharatvarsh March 23, 2026 08:42 AM

Maa Skandamata Katha In Hindi:आज चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है. ये दिन आदिशक्ति के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित किया गया है. नवरात्रि के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों के पूजन का विधान है. नवरात्रि के पांचवें दिन विधि-विधान से मां स्कंदमाता का पूजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा करने से निःसंतान दंपत्ति संतान सुख प्राप्त करते हैं.

मां स्कंदमाता का पूजन करने से जीवन में सुख, शांति व समृद्धि में वृद्धि होती है. माता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य किया जाता है. व्रत कथा का पाठ करने से मां प्रसन्न होकर जीवन को खुशियों से भर देती हैं. ऐसे में आज माता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य करें. आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की कथा.

मां स्कंदमाता की कथा (Maa Skandamata Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक तारकासुर नाम का असुर था. उसने अपनी कठिन तपस्या से ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया. ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उसको ये वर दिया कि उसकी मृत्यु सिर्फ महादेव के पुत्र के हाथों ही संभव हो सकेगी. उस दौरान महादेव ध्यान में लीन थे और सती का दूसरा जन्म अभी नहीं हुआ था. तब तारकासुर को लगा कि अब शिव जी कभी विवाह नहीं करेंगे. ऐसे में उनका पुत्र नहीं होगा और वो अमर हो जाएगा.

इसके बाद तारकासुर के अत्याचार करना शुरू कर दिया. उसके अत्याचार से परेशान होकर देवता भगवान शिव के पास पहुंंचे. देवताओं ने शिव जी को ध्यान से जगाने का प्रयास किया. उस दौरान देवी सती का जन्म पार्वती के रूप में हिमालयराज के यहां हुआ. मां पार्वती ने महादेव को पाने के लिए तप किया. जब देवताओं की कोशिशों से महादेव का ध्यान टूटा तो उनका विवाह मां पार्वती से हुआ. इसके बाद कार्तिकेय भगवान (स्कंद) का जन्म हुआ.

मां पार्वती ने स्वयं स्कंद भगवान को युद्ध की शिक्षा दी. बाद में कार्तिकेय भगवान ने तारकासुर का वध किया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंदमाता की सच्चे मन से साधना करने से संतान के जीवन से जुड़ी समस्याएं खत्म होती हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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