आदिम जाति विभाग के वॉटरमैन पर आरोप, कम्प्यूटर ऑपरेटर बन कर रहा लाखों का हिसाब, सरकारी आवास पर भी कब्जा, किसकी शे पर हो रही धांधली?
Webdunia Hindi March 23, 2026 06:44 PM


मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में किस हद तक धांधली चल रही है, इसका एक ताजा उदाहरण सामने आया है। मामला इंदौर के आदिम जाति कल्याण के जनजातीय विभाग से जुड़ी अनियमितता का है। इस विभाग में एक अदने से वॉटरमैन (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) की मनमानी और उससे जुड़े दूसरे कर्मचारी और अफसर की मिलीभगत से इस धांधली को अंजाम दिया जा रहा है। हैरान करने वाली बात है कि इसे लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

दरअसल, आदिम जाति कल्याण के विभाग में सचिन मंडलोई पिछले कई साल से वॉटरमैन के पद पर पदस्थ हैं। पद के मुताबिक मंडलोई का काम है कि वे अपने विभाग के अफसर और कर्मचारियों को पानी पिलाएं, लेकिन अपनी मूल भूमिका को छोड़कर वे कम्प्यूटर ऑपरेटर की कुर्सी पर जा बैठे हैं। इस कुर्सी पर वे विभाग के लाखों रुपए के बिल उनके पास से होकर गुजरते हैं। इस मनमानी का आलम यह है कि मंडलोई को इस विभाग के कई अधिकारियों के आईडी और पासवर्ड सौंप रखे हैं, जिसकी मदद से वे लाखों रुपए जमा और निकासी का काम करते हैं। शासन के 2020 के आदेश की सूची में 30 नंबर पर मंडलोई का पद वॉटरमैन का ही लिखा हुआ है। वेबदुनिया की पड़ताल में यह धांधली सामने आई है। इस संबंध में वेबदुनिया ने विभाग के आला अधिकारियों से चर्चा की तो उनके अपने तर्क थे।
  • जनजातीय विभाग में वॉटरमैन बना कंप्यूटर ऑपरेटर
  • अफसरों के आईडी-पासवर्ड लेकर कर रहा है लाखों रुपए का हिसाब-किताब
  • वॉटरमैन कैसे बन बैठा आदिम जाति कल्याण विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर
  • किन अफसरों की शह पर ऑपरेटर की कुर्सी पर जा बैठा वॉटरमैन
पड़ताल में सामने आया है कि सचिन मंडलोई ने जुगाड़- तुगाड़ और साठगांठ कर के खुद को कुशल श्रमिक श्रेणी में करवा लिया है, जबकि आधिकारिक रूप से इसकी कोई सूची जारी नहीं हुई है। वेबदुनिया के विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी सामने आई है कि अगर इस मामले की जांच होती है तो और भी ऐसे लोग सामने निकलकर आ सकते हैं जो अपने मूल पद का काम छोड़कर विभाग के दूसरे काम कर रहे हैं।

पात्र नहीं फिर भी रह रहा छात्रावास में : इतना ही नहीं, वॉटरमैन सचिन मंडलोई के बारे में जानकारी सामने आई है कि वे पिछले करीब 20 साल से सांवरिया नगर में स्थित जूनियर अनुसूचित जाति छात्रावास के अधीक्षक आवास में रह रहे हैं। जबकि नियमों के मुताबिक वे इसके पात्र नहीं है। इतना ही नहीं, इस आवास के पानी और बिजली के बिल का भुगतान भी शासकीय मद से किया जा रहां है। हालांकि छात्रावास के अधीक्षक जितेन्द्र कडवाल ने इस बारे में कुछ भी खुलकर नहीं बताया। हालांकि मैं वहीं रहता हूं, लेकिन हकीकत में वे मूसाखेड़ी इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं। सवाल यह है कि आखिर इतना सबकुछ किस की साठगांठ पर किया जा रहा है। और ऐसी क्या मजबूरी है कि एक चतुर्थ श्रेणी वॉटरमेन से विभाग में यह काम करवाया जा रहा है।

क्या कहा सचिन मंडलोई ने : वॉटरमैन सचिन मंडलोई ने इन आरोपों को लेकर वेबदुनिया को बताया कि मुझे साल 2004 में तत्कालीन डीओ शर्मा जी ने जो काम दिया था, वही कर रहा हूं। मुझे अधिकारियों ने कंप्यूटर संबंधी काम करने को कहा है, वही कर रहा हूं। होस्टल के आवास में रहने पर मंडलोई ने कहा कि हां वे होस्टल के आवास में रहते हैं, लेकिन उसका नियमानुसार 300 रुपए करीब एचआरए कटता है। हालांकि यह भी जांच का विषय है कि क्या मंडलोई वाकई एचआरए और सरकारी आवास में रहने का पात्र है?

मेरी जानकारी में आएगा तो जांच करवाऊंगा : जनजातीय विभाग के कमिश्नर तरुण राठी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। जब जिला मुख्यालय से मेरे पास जानकारी आएगी तो मैं जांच करवाऊंगा और इसके बाद ही आपको स्पष्ट रूप से कुछ कह सकूंगा। आपने मामला संज्ञान में दिलाया है तो मैं अपने स्तर पर भी जानकारी निकालने की कोशिश करूंगा।

काम तो कर रहे हैं लेकिन मैं जानकारी ले लेता हूं : इस बारे में आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त नरेन्द्र भिडे से जब चर्चा की तो उन्होंने स्वीकार किया और कहा कि हां, सचिन मंडलोई तीन-चार साल से ये काम तो कर रहे हैं, लेकिन मुझे इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है, ऐसा क्यों हो रहा है। मैं एक बार पूरी डिटेल ले लेता हूं, इसके बाद आपको पूरी जानकारी दूंगा।
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