डिजिटल पेमेंट में उछाल के साथ बढ़े फ्रॉड, DFS पैनल ने सुरक्षा सुधार की दी बड़ी सलाह
et March 23, 2026 08:43 PM
भारत की डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने पिछले कुछ सालों में जबरदस्त ग्रोथ हासिल की है और इसका सबसे मजबूत आधार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस बन गया है। हाल ही में डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ी संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में UPI की लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता और बैंकिंग सिस्टम में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत बताई है।

समिति ने कहा कि UPI ने डिजिटल लेनदेन को आम लोगों तक पहुंचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन इसके तेजी से विस्तार के साथ कई नई समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इनमें पेमेंट सिस्टम की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, बैंकिंग सिस्टम की साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन फ्रॉड का बढ़ता खतरा शामिल है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।
जनवरी 2026 में रिकॉर्ड UPI ट्रांजेक्शननेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में UPI के जरिए लगभग 21.7 अरब ट्रांजेक्शन किए गए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 28.33 लाख करोड़ रुपए रही। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि UPI अब भारत की डिजिटल इकॉनमी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।

फरवरी 2026 में भी UPI का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा, जिसमें करीब 20.39 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत की ग्रोथ को दिखाता है। हर दिन औसतन लगभग 72.8 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जो इस सिस्टम की लोकप्रियता और उपयोग को दर्शाता है।
साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंतासमिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि इतनी तेजी से बढ़ रही इस डिजिटल पेमेंट प्रणाली को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए एक मजबूत आर्थिक मॉडल जरूरी है। अभी UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट शून्य है, जिससे बैंकों और पेमेंट कंपनियों की कमाई सीमित हो जाती है और सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके साथ ही रिपोर्ट में साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी के मामले भी बढ़ रहे हैं। इसलिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को एडवांस एन्क्रिप्शन और रियल-टाइम फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने दिया संतुलित विकास का सुझावविशेषज्ञों का मानना है कि अगर UPI की आर्थिक मजबूती और साइबर सुरक्षा दोनों पर सही तरीके से काम किया जाए, तो भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है।
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