ईरान-इजरायल युद्ध का असर: $200 के पार पहुंचा जेट फ्यूल, इंडिगो और आकासा समेत कई एयरलाइंस ने बढ़ाए हवाई किराए
et March 23, 2026 08:43 PM
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजरायल की ईरान के साथ जंग ने वैश्विक विमानन उद्योग की कमर तोड़ दी है। कुछ ही दिनों के भीतर जेट फ्यूल (ATF) की कीमतें 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। चूंकि एयरलाइंस के कुल खर्च का करीब 25% हिस्सा अकेले ईंधन पर होता है, इसलिए कंपनियों ने अब इसका बोझ यात्रियों पर डालना शुरू कर दिया है।
इंडिगो और आकासा ने लगाया फ्यूल सरचार्ज
भारतीय यात्रियों के लिए सफर अब महंगा होने वाला है। आपको बता दें कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज लागू कर दिया है, जिसमें यूरोप की उड़ानों के लिए 2,300 रुपये तक की बढ़ोतरी शामिल है। वहीं, आकासा एयर ने भी 199 से 1,300 रुपये तक का सरचार्ज लगाया है। वियतनाम एयरलाइंस जैसी कंपनियां तो अब सरकारों से टैक्स में कटौती की गुहार लगा रही हैं जिससे 70% तक बढ़े परिचालन खर्च को कम किया जा सके।
दुनियाभर में उड़ानों की कटौती
वैश्विक स्तर पर भी हालात चिंताजनक हैं। एयर फ्रांस-केएलएम ने लंबी दूरी की उड़ानों पर प्रति राउंड ट्रिप करीब 50 यूरो यानी लगभग 4,500 रुपये की बढ़ोतरी की है। थाई एयरवेज ने किराए 10-15% तक बढ़ा दिए हैं, जबकि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय किरायों में 100 डॉलर तक की वृद्धि की है। बता दें स्थिति इतनी गंभीर है कि SAS (स्कैंडिनेवियाई एयरलाइन) ने अकेले अप्रैल महीने में 1,000 उड़ानें रद्द करने का फैसला किया है।
भविष्य की चिंता
दिग्गज विमानन कंपनियों ने अपने वित्तीय अनुमानों को बदलना शुरू कर दिया है। यूनाइटेड एयरलाइंस के CEO स्कॉट किर्बी ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतें 2027 के अंत तक 100 डॉलर के ऊपर रह सकती हैं, जिसके वजह से कंपनी घाटे वाली उड़ानों को बंद कर रही है। अमेरिकन एयरलाइंस को भी पहली तिमाही में 400 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त खर्च का अनुमान है। हालांकि, ब्रिटिश एयरवेज की पैरेंट कंपनी IAG ने फिलहाल कीमतें नहीं बढ़ाई हैं क्योंकि उन्होंने पहले ही कम कीमत पर ईंधन का स्टॉक सुरक्षित कर लिया था।