इच्छा मृत्यु लेने वाले देश के पहले हरीश राणा का मंगलवार को एम्स में निधन हो गया। इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया के तहत उन्हें पिछले 10 दिनों से खाना और पानी नहीं दिया गया था। अंतत: दिल्ली के एम्स में भर्ती हरीश राणा को दर्दभरी जिंदगी के मुक्ति मिल गई।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके परिवार को इच्छा मुत्यु की इजाजत दी थी। इसके बाद से ही उन्हें मेडिकल प्रोसेस में रखा गया था। जिसमें उनके जीवनरक्षक उपकरण हटा लिए गए थे। साथ ही भोजन और पानी देना बंद कर दिया गया था। बता दें कि डॉक्टरों के मुताबिक पिछले कई दिनों से वे बिना भोजन और पानी के थे। हालांकि फिर भी उनके स्वास्थ्य में कोई अचानक गिरावट दर्ज नहीं की गई थी।
कब और कैसे शुरू हुई प्रक्रिया : गाजियाबाद निवासी हरीश राणा को 14 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 15 मार्च से उनका तरल भोजन बंद कर दिया गया और 17 मार्च से पानी देना भी रोक दिया गया। यह सब पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है, जिसमें जीवनरक्षक साधनों और पोषण को धीरे-धीरे हटाया जाता है।
13 साल से कोमा में थे हरीश : हरीश राणा पिछले लगभग 13 वर्षों से कोमा में थे। सामान्यतः जब किसी व्यक्ति को इतने दिनों तक भोजन और पानी नहीं दिया जाता, तो शरीर में बेचैनी, दर्द और अन्य लक्षण दिखाई देने लगते हैं। लेकिन चूंकि वे लंबे समय से कोमा में थे, इसलिए उनके शरीर में इस तरह की कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिल रही थी। यही वजह है कि उनकी स्थिति 'स्थिर' बताई जा रही थी। लेकिन मंगलवार को उनका निधन हो गया।
डॉक्टरों के मुताबिक मरीज को किसी भी प्रकार की पीड़ा से बचाने के लिए उन्हें नियमित रूप से दर्द निवारक दवाएं और अन्य जरूरी उपचार दिए जा रहे थे। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मरीज की अंतिम अवस्था शांत और बिना कष्ट के बीते।
परिवार का भावनात्मक पहलू : हरीश राणा के परिवार को इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही थी और उन्हें लगातार काउंसलिंग भी प्रदान की जा रही थी।
Edited By: Naveen R Rangiyal