प्रोस्टेट कैंसर का खतरा किन पुरुषों में ज़्यादा होता है? "एक्सपर्ट से जानें'
Newshimachali Hindi March 26, 2026 09:42 AM

Prostate Cancer in Men: पुरुष अक्सर अपनी सेहत को लेकर सजग तो रहते हैं लेकिन कई ऐसे छुपे हुए खतरे होते हैं जिसके बारे में पता समय से नहीं चल पाता. ऐसी ही एक बीमारी प्रोस्टेट कैंसर की है.

कैंसर अपने आप में खतरनाक बीमारी है. ऐसे में सावधानी बेहद जरूरी है. प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी पुरुषों में चुपचाप पनपती है. हैरान करने वाली बात ये है कि इसके लक्षण भी पहले से दिखाई नहीं देते. एक्सपर्ट्स का कहना की कुछ पुरुषों में इसका खतरा दूसरों से अधिक रहता है. समझतें हैं कि किन पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है और क्या सावधानी रखनी चाहिए? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि प्रोस्टेट कैंसर है क्या?

सबसे पहले समझें कि प्रोस्टेट एक प्रकार की ग्रंथि होती है जो पुरुषों के ब्लैडर (मूत्राशय) के नीचे और मूत्र नली के आसपास होती है. ये ग्रंथि वीर्य (semen) बनाती है. साथ ही प्रजनन में मदद करती है. परेशानी तब आती है जब इस ग्रंथि की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं, उनका बढ़ना अनगिनत होता है जो मिलकर ट्यूमर बना देती है और शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाती हैं. इससे प्रोस्टेट कैंसर का होता है.

किन पुरुषों में ज्यादा होता है खतरा?

अब आते हैं सबसे अहम हिस्से पर कि किन पुरुषों को इसका खतरा ज्यादा है. इसके पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारक होते हैं जो प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी को बढ़ा सकते हैं.

1- उम्र का असर- 40 से 45 की उम्र के बाद पुरुषों में इसके खतरे बढ़ने लगते हैं. 60 की उम्र के बाद इसकी संभावना और ज्यादा हो जाती है. मतलब जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है.

2- परिवार का इतिहास (Genetics)– अगर परिवार में पिता, चाचा या भाई को प्रोस्टेट कैंसर रहा है, तो यह खतरा और बढ़ जाता है. इसे मेडिकल भाषा में फैमिलियल रिस्क कहा जाता है.

3- लाइफस्टाइल फैक्टर– बहुत ज्यादा जंक फूड, तैलीय खाना, शराब और स्मोकिंग की आदत रखने वाले पुरुषों में भी यह खतरा ज्यादा होता है. मोटापा बढ़ रहा है और कोई पुरुष कम एक्टिव रहता है, फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान नहीं देता है, तो ये भी एक कारण हो सकता है.

4-हार्मोनल बदलाव– जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर असंतुलित रहता है, उसमें भी प्रोस्टेट की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होने का खतरा बढ़ जाता है.

शुरुआती लक्षण क्यों नहीं दिखते?

प्रोस्टेट कैंसर का सबसे बड़ा डर यही होता है कि इसके शुरुआती लक्षण नहीं दिखते और कैंसर चुपचाप बढ़ता रहता है. कुछ लक्षण ऐसे हैं तो सावधान करने वाले हो सकते हैं जैसे- बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने में जलन या रुकावट आना या महसूस होना. लेकिन इन लक्षणों तक कैंसर काफी बढ़ चुका होता है. इसलिए ही सलाह दी जाती है कि नियमित चेकअप बहुत जरूरी है. खासकर उन पुरुषों को जिनके रिस्क फैक्टर ज्यादा हैं.

प्रोस्टेट कैंसर के टेस्ट और डायग्नोसिस

  • PSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट इसमें खून की जांच से पता चलता है कि प्रोस्टेट से निकले प्रोटीन का स्तर सामान्य है या ज्यादा.
  • डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE) इसमें डॉक्टर हाथ से प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करते हैं.
  • जरूरत पड़ने पर MRI या बायोप्सी भी कराई जाती है.

क्या बचाव संभव है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरी तरह से बचाव करना संभव नहीं है, लेकिन खतरे को कम जरूर किया जा सकता है. संतुलित आहार लें जिसमें हरी सब्जियाँ, फल और फाइबर की मात्रा ज्यादा हो. स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाना ही कई सारी बीमारियों से आपको दूर कर देता है. नियमित व्यायाम करें ताकि वजन नियंत्रित रहे, बढ़ता वजन ही परेशानी है कई बीमारियों की, इसके अलावा 40 साल के बाद सालाना हेल्थ चेकअप जरूर करें.

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