लखनऊ कैंट फायरिंग केस में बृजेश सिंह समेत 5 आरोपी बरी, 22 साल बाद आया फैसला
TV9 Bharatvarsh March 29, 2026 01:42 AM

उत्तर प्रदेश की सियासत को हिलाकर रख देने वाले 2004 के कैंट फायरिंग मामले में आखिरकार 22 साल बाद फैसला आ गया . लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट ने मुख्य आरोपी बृजेश सिंह और उनके चार साथियों को साक्ष्यों के अभाव में और संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने शनिवार (28 मार्च) को बरी कर दिया.

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका. इस फैसले के साथ करीब दो दशक पुराना वह चर्चित मामला समाप्त हो गया, जिसने उस समय पूरे प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया था.

13 जनवरी 2004 की वह खूनी शाम

यह घटना 13 जनवरी 2004 की है. लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र में सदर रेलवे क्रॉसिंग पर दो प्रभावशाली नेताओं के काफिले अचानक आमने-सामने आ गए. एक तरफ गाजीपुर से लखनऊ आ रहे तत्कालीन विधायक मुख़्तार अंसारी अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे थे. दूसरी तरफ लखनऊ से गाजीपुर लौट रहे थे तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय. इस दौरान दोनों पक्षों के समर्थक भी साथ थे.

दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग

जैसे ही दोनों काफिलों ने एक-दूसरे को पहचाना माहौल गरमा गया. इसके बाद कुछ ही पलों में दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई. करीब पांच मिनट तक रुक-रुक कर गोलियां चलीं. जिससे इलाके में दहशत फैल गई. चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

दोनों पक्षों ने दर्ज कराई शिकायत

फायरिंग के तुरंत बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए. मुख़्तार अंसारी की तरफ से कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह और अन्य पर हत्या के प्रयास, दंगा और आग्नेयास्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई. पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर छानबीन शुरू की. मामला लंबे समय तक कोर्ट में चला. इस दौरान दर्जनों गवाह पेश किए गए, लेकिन समय के साथ कई प्रत्यक्षदर्शी मुकर गए या साक्ष्य कमजोर पड़ते चले गए.

कोर्ट का फैसला

लंबी सुनवाई के बाद एमपी/एमएलए कोर्ट के जज ने बृजेश सिंह के अलावा त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू को सभी आरोपों से बरी कर दिया. इस मामले में आरोपी रहे कृष्णानंद राय की भी कुछ साल बाद हत्या कर दी गई थी.

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया. जिसके बाद उस समय यूपी की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बना अंततः खत्म हो गया. साल 2004 में मुख़्तार अंसारी और कृष्णानंद राय दोनों ही गाजीपुर क्षेत्र के दबदबा रखने वाले नेता थे. दोनों के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता बताई जाती थी. कैंट फायरिंग की घटना ने उस समय न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे पूर्वांचल में सियासी हलचल मचा दी थी. अब 22 साल बाद कोर्ट के इस फैसले ने उस पुरानी घटना को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया है.

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