भारत की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। जब जड़ें कमजोर होती हैं, तो आंधी और भी भयानक लगने लगती है। यही आज की भारत की स्थिति है। हालांकि, यह कहना गलत होगा कि सरकार को अर्थव्यवस्था की बुनियादी समस्याओं का ज्ञान नहीं है।
प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के आश्वासनों के बावजूद, वास्तविकता यह है कि केंद्र सरकार खुद चिंतित है। वित्त मंत्रालय की हालिया मासिक समीक्षा रिपोर्ट इस बात का स्पष्ट प्रमाण है। रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद खतरों का उल्लेख किया गया है। यह स्वीकार किया गया है कि इस महीने आर्थिक गतिविधियों में कमी आई है। इसके पीछे घरेलू कारण तो हैं, लेकिन विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस कारण खाद्य पदार्थों की महंगाई एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है, जो ग्रामीण और शहरी गरीबों पर असमान प्रभाव डाल रही है।
ऊर्जा की बढ़ती लागत महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती है। इसके साथ ही, व्यापार घाटा और चालू खाते का घाटा भी बढ़ रहा है। विदेशी निवेश में कमी से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का खतरा उत्पन्न हो गया है। इस प्रकार, समस्या व्यापक है। जब जड़ें कमजोर होती हैं, तो आंधी और भी भयानक लगती है। यही भारत की वर्तमान स्थिति है। यह नहीं कहा जा सकता कि सरकार को अर्थव्यवस्था की बुनियादी समस्याओं का ज्ञान नहीं है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इन मुद्दों पर बार-बार चेतावनी दी है, जिन्होंने हालिया समीक्षा रिपोर्ट तैयार की है।
उदाहरण के लिए, 2025 में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि वित्तीय क्षेत्र का अनियंत्रित विकास वास्तविक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। पिछले वर्ष उन्होंने कहा था कि भारत में आईपीओ प्रवर्तक निवेशकों के लिए निकास का साधन बन गए हैं।
इसका मतलब है कि ये अब पूंजी निवेश का साधन नहीं रह गए हैं। इस वर्ष जनवरी में पेश आर्थिक सर्वे में कहा गया कि भारतीय निजी क्षेत्र जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने में असफल रहा है। इसके बावजूद, निजी क्षेत्र और वित्तीय आर्थिकी को ध्यान में रखते हुए ऊंची जीडीपी वृद्धि दर को भारतीय अर्थव्यवस्था की पहचान बना दिया गया है। लेकिन ये खंभे रेत पर खड़े हैं। अब जब परिस्थितियां प्रतिकूल हो गई हैं, तो ये डोलते हुए नजर आ रहे हैं। मासिक समीक्षा रिपोर्ट का सार यही है।