अमेरिका पर ड्रोन हमले का खतरा!
Tarunmitra April 01, 2026 10:42 AM

वॉशिंगटन: ईरान युद्ध के बीच अमेरिका को भी ड्रोन हमले का खतरा मंडरा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन इस बात पर विचार कर रहा है कि वाशिंगटन के एक मिलिट्री बेस के पास जहां रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और विदेश सचिव मार्को रूबियो रहते हैं, एक शक्तिशाली एंटी-ड्रोन लेज़र सिस्टम तैनात किया जाए। यह विचार उस क्षेत्र में असामान्य ड्रोन गतिविधियों की रिपोर्टों के बाद आया है।
हवाई क्षेत्र में ड्रोन देखे जाने के बाद अलर्ट
अमेरिकी सेना LOCUST नामक लेजर सिस्टम को फोर्ट लेस्ली जे. मैकनेयर के पास तैनात करने की योजना बना रही है। यह वही इलाका है जहां रक्षा मंत्री Pete Hegseth और विदेश मंत्री Marco Rubio रहते हैं। हाल ही में इस क्षेत्र के हवाई क्षेत्र में ड्रोन देखे जाने के बाद निगरानी (सर्विलांस) की आशंका बढ़ गई है।

FAA ने बताई चिंता, विमानों के लिए बताया खतरा
हालांकि, इस लेजर सिस्टम की तैनाती को लेकर संघीय विमानन प्रशासन (Federal Aviation Administration) ने चिंता जताई है। FAA का कहना है कि इस तरह की लेजर तकनीक व्यस्त हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहे विमानों और पायलटों के लिए खतरा बन सकती है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि रोनाल्ड रीगन नेशनल एयरपोर्ट बेस से महज करीब 2 मील की दूरी पर स्थित है।

पिछले साल पोटोमैक नदी के ऊपर हवा में हुई एक घातक टक्कर में 67 लोगों की मौत के बाद से FAA को विमानन सुरक्षा को लेकर कड़ी जांच का सामना करना पड़ा है। विमानन अधिकारी अब सावधानीपूर्वक समीक्षा कर रहे हैं कि क्या इस लेज़र तकनीक को घनी आवाजाही वाले हवाई गलियारों में तैनात करने से आस-पास के विमानों या पायलटों की दृष्टि को खतरा हो सकता है।

व्हाइट हाउस में हुई बैठक में हुई तीखी बहस
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर हाल ही में व्हाइट हाउस में हुई एक राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक में भी तीखी बहस हुई, जिसकी अध्यक्षता मार्को रुबियो ने की। रक्षा विभाग लेजर सिस्टम के व्यापक उपयोग की मंजूरी चाहता है, जबकि विमानन नियामक सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेजर हथियारों की तारीफ करते हुए उन्हें पारंपरिक मिसाइल सिस्टम जैसे पैट्रियट की तुलना में सस्ता और अधिक प्रभावी विकल्प बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन खतरों से निपटने के लिए यह तकनीक कारगर हो सकती है, लेकिन इसे घनी आबादी और व्यस्त हवाई क्षेत्र में लागू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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