News India Live, Digital Desk: आलिया भट्ट स्टारर सुपरहिट फिल्म 'राजी' एक बार फिर विवादों के घेरे में है। फिल्म जिस किताब 'कॉलिंग सहमत' पर आधारित है, उसके लेखक और पूर्व नौसेना अधिकारी हरिंदर सिक्का ने फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। सिक्का का दावा है कि मेघना ने फिल्म के अंत में जानबूझकर भारतीय राष्ट्रध्वज (तिरंगा) को हटाकर पाकिस्तानी झंडा दिखाया और उन्हें अपमानजनक मैसेज भी भेजे।तिरंगे को लेकर क्या है पूरा विवाद?एक हालिया इंटरव्यू के दौरान हरिंदर सिक्का ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि फिल्म के आखिरी सीन में, जहां मुख्य पात्र 'सहमत' (आलिया भट्ट) वापस भारत लौटती है, वहां मूल रूप से तिरंगा फहराया जाना चाहिए था। सिक्का के अनुसार, मेघना गुलजार ने उस सीन से भारतीय झंडे को हटा दिया और इसके बजाय पाकिस्तानी झंडा दिखाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करके फिल्म के जरिए एक अलग नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई, जो मूल कहानी की आत्मा के खिलाफ था।"मेघना ने मुझे घटिया मैसेज भेजे"लेखक सिक्का यहीं नहीं रुके; उन्होंने यह भी खुलासा किया कि फिल्म के निर्माण के दौरान और उसके बाद उनके और मेघना के बीच संबंधों में काफी कड़वाहट आ गई थी। उन्होंने कहा, "मेघना गुलजार ने मुझे बहुत ही घटिया और अपमानजनक मैसेज भेजे थे।" सिक्का का मानना है कि निर्देशक ने कहानी के साथ छेड़छाड़ की और उनके क्रेडिट को भी कम करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म में सहमत को 'डिप्रेशन' में जाते हुए दिखाया गया है, जबकि असलियत में वह एक बेहद बहादुर और मानसिक रूप से मजबूत जासूस थीं।फिल्म 'राजी' और 'कॉलिंग सहमत' का सफरआधार: फिल्म 2008 में आई हरिंदर सिक्का की किताब 'कॉलिंग सहमत' पर आधारित है।कहानी: यह एक कश्मीरी जासूस की सच्ची कहानी है, जिसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान जाकर भारतीय खुफिया एजेंसी के लिए काम किया था।विवाद की जड़: सिक्का का कहना है कि फिल्म में सहमत को अपनी ड्यूटी के प्रति पछतावा करते हुए दिखाया गया है, जो कि सरासर गलत है।पहले भी लग चुके हैं मेघना पर आरोपयह पहली बार नहीं है जब हरिंदर सिक्का ने मेघना गुलजार पर निशाना साधा हो। इससे पहले भी वह कई मंचों पर कह चुके हैं कि मेघना ने उन्हें फिल्म के प्रमोशन और अवॉर्ड फंक्शन्स से दूर रखने की साजिश रची थी। सिक्का ने यहां तक कहा था कि 'राजी' को 'छपाक' की निर्देशक ने एक 'एंटी-वॉर' फिल्म बनाने की कोशिश की, जिससे कहानी का असली देशभक्ति वाला जज्बा फीका पड़ गया।