'अगर मैं न होता तो इजरायल मिट जाता…' – डोनाल्ड ट्रंप का मिडिल ईस्ट पर सनसनीखेज दावा, चीन-जापान को दी खुली चेतावनी
UPUKLive Hindi April 02, 2026 07:53 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बेबाक और हैरान कर देने वाले बयानों के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक संबोधन के दौरान ट्रंप ने खुद की जमकर तारीफ की और दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे अद्वितीय हैं। उन्होंने आत्ममुग्ध अंदाज में कहा कि अगर वह सत्ता में नहीं होते, तो आज दुनिया की तस्वीर कुछ और ही होती। ट्रंप के अनुसार, इजरायल की सुरक्षा से लेकर मिडिल ईस्ट के समीकरण और परमाणु हथियारों का मुद्दा, सब कुछ उनके कुशल नेतृत्व के कारण ही नियंत्रण में है।

ईरान में ‘तख्तापलट’ और सैन्य कार्रवाई पर बड़ा खुलासा

बुधवार को वाशिंगटन में ईस्टर के मौके पर ट्रंप ने ईरान में हुई सैन्य कार्रवाइयों का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने इजरायल की पीठ थपथपाते हुए दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व समूहों को खत्म कर दिया है, जिससे वहां सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हुआ। ट्रंप ने अपने खास अंदाज में बताया कि कैसे पहले मौजूदा शासन को हटाया गया और फिर नेतृत्व चुनने के लिए इकट्ठा हुए समूहों को निशाना बनाया गया। उन्होंने संकेत दिया कि अब वहां एक ‘तीसरे समूह’ पर कार्रवाई चल रही है, जिसे उन्होंने पिछले शासकों के मुकाबले कम कट्टरपंथी बताया है। उनके इस बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

‘मैं सरकारें बदलने के पक्ष में नहीं, जो हुआ वो महज संयोग’

अपनी पुरानी नीति को दोहराते हुए ट्रंप ने साफ किया कि वे किसी दूसरे देश की सरकार को जबरन बदलने (Regime Change) के पक्षधर नहीं रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कहीं ऐसा बदलाव हुआ भी है, तो वह केवल एक ‘संयोग’ था, क्योंकि सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया जटिल होती है और अक्सर हालात को और बिगाड़ देती है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकलने और जनरल कासिम सुलेमानी पर किए गए हमले को पूरी तरह सही ठहराया। ट्रंप के मुताबिक, ये कदम मिडिल ईस्ट में बड़े खतरों को टालने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी थे।

अपने मुंह मियां मिट्ठू बने ट्रंप: इजरायल की सुरक्षा का लिया श्रेय

ट्रंप ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनकी नीतियों की वजह से ही आज इजरायल सुरक्षित है और मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में संकेत दिया कि यदि वह नेतृत्व में नहीं होते, तो परमाणु हथियारों का खतरा पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका होता। अपने भाषण के दौरान उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने जो “बेहतरीन” काम किए हैं, वह आज पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: सिर्फ अमेरिका का ठेका नहीं!

समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर ट्रंप ने दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जमकर नसीहत दी। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का जिक्र करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को सुरक्षित रखना सिर्फ अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। ट्रंप ने चीन, जापान, साउथ कोरिया और फ्रांस जैसे देशों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब इन देशों की ऊर्जा आपूर्ति और तेल इसी रास्ते पर निर्भर है, तो इन्हें भी इसकी सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अब वैश्विक व्यापार की सुरक्षा का बोझ सभी प्रमुख देशों को मिलकर उठाना होगा।

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