एक्सपोर्ट रुका, दुबई पोर्ट पर फंसे कंटेनर… बीकानेर की भुजिया इंडस्ट्री पर संकट, कारीगरों के रोजगार पर खतरा!
TV9 Bharatvarsh April 04, 2026 02:43 AM

Bikaner News: जब हम देश के पसंदीदा स्नैक की बात करते हैं तो एक नाम सबसे ऊपर आता है- बीकानेरी भुजिया. कुरकुरी, सुनहरी, उत्तम मसालों से भरपूर और बेहद स्वादिष्ट यह प्रतिष्ठित नमकीन सिर्फ एक भोजन से कहीं अधिक है. यह भारत की संस्कृति और पहचान का एक अभिन्न अंग है. शाम की चाय से लेकर भव्य भारतीय शादियों तक, भुजिया ने हमारी थालियों में अपनी स्थायी जगह बना ली है. हालांकि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के चलते अब भुजिया पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हें.

दरअसल, राजस्थान के बीकानेर की पहचान मानी जाने वाली ‘भुजिया’ का खाड़ी देशों में निर्यात इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है. युद्ध के हालातों के चलते करीब 100 कंटेनर माल का एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप हो गया है. जानकारी के मुताबिक, खाड़ी देशों में हर साल करीब 50 हजार टन बीकानेरी भुजिया, पापड़ और नमकीन भेजा जाता है, लेकिन मौजूदा हालातों के कारण दुबई समेत अन्य देशों के बंदरगाहों पर कंटेनर फंस गए हैं.

बंदरगाह पर किराया 1700% बढ़ा

सबसे बड़ा झटका किराए में भारी बढ़ोतरी से लगा है. दुबई के पोर्ट राशिद बंदरगाह पर कंटेनर का किराया 120 डॉलर से बढ़कर 2200 डॉलर तक पहुंच गया है. यानी करीब 1700% की बढ़ोतरी. बीकानेर भुजिया एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद प्रकाश अग्रवाल के अनुसार, हर महीने 15 से 20 कंटेनर भुजिया, पापड़ और नमकीन का निर्यात होता है, जो फिलहाल बंद है. अन्य देशों में भेजे जाने वाले करीब 80 कंटेनर माल भी अटका हुआ है.

कीमतों और रोजगार पर असर

अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भुजिया और पापड़ के दामों में 5 से 10 रुपए प्रति किलो तक बढ़ोतरी हो सकती है. बीकानेर के हजारों कारीगरों और श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है. कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय हालातों का सीधा असर अब बीकानेर के पारंपरिक उद्योग पर दिखने लगा है, जिससे व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है.

150 साल पुराना इसका इतिहास

बीकानेरी भुजिया का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है, जिसकी शुरुआत 1877 में बीकानेर के महाराजा डूंगर सिंह के शासनकाल में हुई थी. राजघराने के रसोइयों द्वारा मोठ की दाल और बेसन से तैयार यह कुरकुरी नमकीन, जिसे पहले ‘डूंगरशाही भुजिया’ कहा जाता था, अपने अनूठे स्वाद और बनावट के कारण आज वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है.

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