Easter 2026: ईस्टर का नाम कैसे पड़ा, कब हुई शुरुआत? जानिए पूरी कहानी
TV9 Bharatvarsh April 04, 2026 03:43 PM

Easter Traditions Explained: ईसाई धर्म में ईस्टर का त्योहार एक नई आशा, विश्वास और विजय का प्रतीक माना जाता है. यह पर्व प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान की खुशी में मनाया जाता है. साल 2026 में ईस्टर का यह पवित्र पर्व 5 अप्रैल, रविवार को पूरी दुनिया में बड़े ही उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाएगा. यह दिन हमें सिखाता है कि सत्य की हमेशा जीत होती है और कठिन समय के बाद एक नई सुबह जरूर आती है. बहुत से लोग इस दिन की ऐतिहासिक महत्ता को जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस त्योहार का नाम ईस्टर कैसे पड़ा और इसकी शुरुआत कब हुई? आइए इस पावन अवसर पर ईस्टर से जुड़ी पूरी कहानी, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थों और इससे जुड़ी परंपराओं को विस्तार से समझते हैं.

ईस्टर नाम की उत्पत्ति और इसका प्राचीन इतिहास

ईस्टर शब्द के पीछे का इतिहास काफी दिलचस्प है. अधिकांश विद्वानों और भाषाविदों का मानना है कि यह शब्द प्राचीन एंग्लो-सैक्सन देवी ईओस्टर के नाम से प्रेरित है. वे वसंत ऋतु, नई शुरुआत और उर्वरता की देवी मानी जाती थीं. पुराने समय में वसंत के आगमन पर उनकी पूजा की जाती थी. चूंकि प्रभु यीशु के पुनरुत्थान का समय भी वसंत ऋतु में ही आता है, इसलिए धीरे-धीरे इस पावन पर्व को ईस्टर के नाम से पुकारा जाने लगा. यह नाम हमें याद दिलाता है कि जिस तरह वसंत में प्रकृति खिल उठती है, उसी तरह ईस्टर भी जीवन में नई उमंग और शांति लेकर आता है. यह समय नई ऊर्जा के साथ जीवन को खुशहाली से भर देता है.

कैसे हुई इस त्योहार की शुरुआत?

ईस्टर की शुरुआत के पीछे एक बहुत ही भावुक और प्रेरणादायक कहानी है. ईसाई धर्मग्रंथों के अनुसार, प्रभु यीशु को गुड फ्राइडे के दिन सूली पर चढ़ाया गया था. उनके शिष्यों और चाहने वालों के लिए वह शोक का समय था. लेकिन सूली पर चढ़ने के तीसरे दिन, यानी रविवार को, जब कुछ महिलाएं उनकी कब्र पर गईं, तो उन्होंने देखा कि वहां पत्थर हटा हुआ था और प्रभु यीशु जीवित हो चुके थे. उनके दोबारा जीवित होने की इस घटना को पुनरुत्थान कहा जाता है. इसी महान घटना की याद में ईस्टर संडे मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जारी है. यह दिन हमें सिखाता है कि सत्य की हमेशा जीत होती है और मृत्यु के बाद भी जीवन का नया मार्ग खुलता है.

ईस्टर एग और बनी की अनोखी परंपराएं

ईस्टर के जश्न में रंग-बिरंगे अंडों और ईस्टर बनी का विशेष महत्व है. बहुत से लोग सोचते हैं कि इनका धार्मिक महत्व क्या है? असल में, अंडा एक नए जीवन के जन्म का प्रतीक है. जिस तरह अंडे के भीतर से एक नया जीवन निकलता है, उसी तरह ईस्टर भी प्रभु यीशु के पुनर्जन्म और नई जिंदगी का संदेश देता है. वहीं, ईस्टर बनी को खुशहाली और नई शुरुआत का दूत माना जाता है. लोग अपने घरों को सजाते हैं, अंडों को सुंदर रंगों से रंगते हैं और एक-दूसरे को उपहार देकर खुशियां बांटते हैं. यह परंपरा बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देती है. यह खुशियों को साझा करने और जीवन में नए रंगों को भरने का एक बहुत सुंदर माध्यम है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिएastropatri.comपर संपर्क करें.

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