कश्मीर से बॉलीवुड तक: संजय सूरी की प्रेरणादायक यात्रा
Stressbuster Hindi April 06, 2026 04:42 AM
संजय सूरी का संघर्ष और सफलता

मुंबई, 5 अप्रैल। संजय सूरी की कहानी कश्मीर से शुरू होकर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो न केवल फिल्मी पर्दे पर, बल्कि असल जिंदगी में भी गहराई से छूती है।


संजय सूरी ने अपने करियर में ऐसे संवेदनशील किरदारों को निभाने का साहस दिखाया, जिन्हें अन्य अभिनेता करने से कतराते थे। अभिनेता 6 अप्रैल को अपना 55वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं।


कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे संजय ने अपने बचपन में कई कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को खो दिया, जिन्हें आतंकवादियों ने मार डाला। इस घटना के बाद उनका परिवार कश्मीर छोड़कर दिल्ली चला गया।


संजय ने कभी नहीं सोचा था कि वह फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखेंगे। उनका सपना स्पोर्ट्स में करियर बनाने का था। एक प्रसिद्ध स्क्वैश खिलाड़ी रहे संजय ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और विज्ञापनों में नजर आने लगे। रिया सेन के साथ उनका निरमा साबुन का विज्ञापन काफी चर्चित हुआ। इस विज्ञापन ने उनकी किस्मत बदल दी और उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'प्यार में कभी-कभी' से फिल्मी दुनिया में कदम रखा।


हालांकि, यह फिल्म सफल नहीं रही, लेकिन इसके बाद उन्हें कई सपोर्टिंग रोल मिले। उन्होंने 'दामन', 'फिलहाल', 'दिल विल प्यार व्यार', और 'पिंजर' जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन असली पहचान उन्हें 2003 में आई 'झंकार बीट्स' से मिली। इस फिल्म में उनका किरदार गंभीर और प्रभावशाली था।


साल 2005 में आई उनकी फिल्म 'माई ब्रदर... निखिल' ने समाज में एचआईवी और एलजीबीटीक्यू मुद्दों पर चर्चा को जन्म दिया। हालांकि, उनके बेहतरीन अभिनय के बावजूद उनका करियर औसत रहा।


एक्टिंग छोड़कर संजय ने फिल्म निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। उनकी पहली फिल्म 'आई एम' को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा, उन्होंने 'चौरांगा' नामक फिल्म का भी निर्माण किया। आज वे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं और अपना प्रोडक्शन हाउस 'एंटीक्लॉक फिल्म्स' चला रहे हैं।


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