Baisakhi 2026: 13 या 14 अप्रैल… कब है बैसाखी? जानें सही तारीख, पूजा का महत्व और खास बातें
TV9 Bharatvarsh April 08, 2026 09:42 AM

Baisakhi Puja Vidhi: बैसाखी का त्योहार उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा में नई फसल के आगमन की खुशी में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष बैसाखी की सही तारीख को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन है, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य देव जब मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह पर्व मनाया जाता है. इस बार सूर्य का राशि परिवर्तन 13 अप्रैल 2026 की रात को हो रहा है इसलिए उदयातिथि के अनुसार बैसाखी 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी.

यह दिन किसानों के लिए सुनहरी फसल काटने का समय होता है और सिख समुदाय के लिए भी इसका ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी.

बैसाखी पूजन का शुभ मुहूर्त और पारंपरिक विधि

बैसाखी के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है. यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें. पूजा के लिए घर के मंदिर में दीप जलाएं और नई फसल के अनाज को भगवान को अर्पित करें. इस दिन गुरुद्वारों में विशेष अरदास और कीर्तन होता है, जहाँ लोग सेवा भाव से मत्था टेकते हैं. कडा प्रसाद का भोग लगाकर आपस में खुशियां बांटी जाती हैं. यह पर्व हमें सिखाता है कि कठिन परिश्रम के बाद मिली सफलता का आनंद अपनों के साथ मिलकर ही लेना चाहिए.

दान-पुण्य का महत्व और नई शुरुआत की खुशियां

धार्मिक दृष्टि से बैसाखी का दिन दान-पुण्य के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है. इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अनाज, फल या वस्त्रों का दान करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है और घर में सुख-शांति लाता है. कई लोग इस दिन अपनी मां का आशीर्वाद लेकर नए कार्यों की शुरुआत करते हैं, जिसे बहुत शुभ माना जाता है. यदि आपके मन व्यवसाय से संबंधित कोई नई योजना है, तो इस सकारात्मक ऊर्जा वाले दिन पर उसका विचार करना फलदायी हो सकता है. समाज के प्रति सेवा का भाव रखना ही इस त्योहार की असली पहचान है.

उत्सव और घर के बने सात्विक भोजन का आनंद

बैसाखी की रौनक भांगड़ा और गिद्धा जैसे पारंपरिक नाच के बिना अधूरी है, जो नई फसल आने की खुशी को बखूबी दिखाते हैं. अगर खाने-पीने की बात करें, तो इस खास दिन पर घर के बने शुद्ध और सात्विक भोजन का अपना ही मजा है. बाजार के पैकेट बंद सामान के बजाय अपनी मां के हाथों से बनी गरमा-गरम खीर, केसरिया पीले चावल या कडा प्रसाद का आनंद लें. घर की रसोई में तैयार इन पकवानों में जो शुद्धता और ममता भरी होती है, वह हमें अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़े रखती है. परिवार के साथ मिल-बैठकर भोजन करना और खुशियां बांटना जीवन के सही संचालन में बहुत मदद करता है. सच तो यह है कि यह त्योहार आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का ही सुंदर प्रतीक है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिएastropatri.comपर संपर्क करें.

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