खाड़ी में महायुद्ध के आसार, पर भारत बेफिक्र! न महंगी होंगी दवाएं और न रुकेगी रसोई गैस की सप्लाई, सरकार ने कर लिया तगड़ा इंतजाम
UPUKLive Hindi April 10, 2026 01:42 AM

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ऐसे में हर भारतीय के मन में बस एक ही सवाल है— क्या इस लड़ाई की आंच हमारी रसोई और जेब तक पहुंचेगी? क्या दवाइयां महंगी हो जाएंगी या गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें लगानी पड़ेंगी? इन तमाम सवालों पर सरकार ने एक हाई-लेवल ब्रीफिंग के बाद देश को भरोसा दिलाया है कि घबराने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है। सरकार का दावा है कि दुनिया भर में सप्लाई चेन बिगड़ने के बावजूद भारत ने अपने लिए एक ऐसा अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ तैयार किया है, जिससे आम आदमी पर इस संकट का कोई असर नहीं होगा।

दवाओं की कीमतों पर ‘ब्रेक’, जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ

अक्सर देखा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय संकट शुरू होते ही दवाओं के कच्चे माल की किल्लत हो जाती है और कीमतें आसमान छूने लगती हैं। लेकिन इस बार भारत ने अपनी रणनीति पहले ही तैयार कर ली है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दवा निर्माता कंपनियों को कच्चे माल की सप्लाई लगातार मिल रही है। इसके लिए एक बेहद सटीक और समन्वित प्लान बनाया गया है। नतीजा यह है कि बाजार में दवाओं की कीमतों में कोई उछाल नहीं आया है। आप तक जीवनरक्षक दवाएं उसी दाम पर पहुंच रही हैं, जो संकट शुरू होने से पहले थे। यानी सेहत के बजट पर कोई खतरा नहीं है।

गैस सिलेंडरों की किल्लत खत्म, कालाबाजारी पर सरकार का कड़ा प्रहार

चूंकि भारत अपनी जरूरत की ज्यादातर गैस और तेल खाड़ी देशों से ही मंगाता है, इसलिए रसोई गैस (LPG) को लेकर चिंता स्वाभाविक थी। मगर हकीकत यह है कि देश में गैस की सप्लाई पहले से भी बेहतर हुई है। सरकार ने गैस की हेराफेरी रोकने के लिए ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) सिस्टम को बेहद सख्त कर दिया है, जिससे असली हकदार तक ही सिलेंडर पहुंच रहा है। आंकड़ों की मानें तो प्रमाणित डिलीवरी में 92% की भारी बढ़ोतरी हुई है।

गैस की उपलब्धता का अंदाजा इस बात से लगाइए कि फरवरी 2026 में जहां रोजाना 77,000 सिलेंडर बिक रहे थे, वहीं कल यह संख्या 1.06 लाख के पार पहुंच गई। साथ ही, लोग अब पाइपलाइन वाली गैस (PNG) को ज्यादा अपना रहे हैं। हाल ही में 18,000 से अधिक लोगों ने अपना पुराना सिलेंडर कनेक्शन छोड़कर पीएनजी अपना लिया है। राहत की एक और बड़ी खबर समुद्र से आई है— भारतीय गैस टैंकर ‘ग्रीन आशा’ युद्ध के सबसे संवेदनशील इलाके यानी ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को पार कर सुरक्षित भारत पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

विदेश से वतन वापसी: 2,170 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया

संकट के इस दौर में सरकार केवल देश के अंदर ही नहीं, बल्कि विदेश में फंसे भारतीयों के लिए भी ढाल बनी हुई है। ईरान की राजधानी तेहरान में भारतीय दूतावास ने एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया है। इस मिशन के तहत 2,170 भारतीय नागरिकों, जिनमें छात्र और मछुआरे शामिल हैं, उन्हें आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्तों से सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।

अपनी कूटनीतिक पकड़ को और मजबूत करने के लिए विदेश मंत्री आगामी 11 और 12 अप्रैल 2026 को यूएई (UAE) के दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा का मकसद न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि युद्ध के माहौल में भी भारत की रणनीतिक साझेदारी और व्यापारिक रिश्ते बरकरार रहें।

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