पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सीजफायर बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन पहुंच चुका है. शनिवार को अमेरिका के साथ होने वाली इस वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. ईरान की पार्लियामेंट के स्पीकर और आम तौर पर प्रैक्टिकल हार्डलाइनर माने जाने वाले मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को अमेरिका के साथ शांति वार्ता की जिम्मेदारी दी गई है. वह इस युद्ध में एक अहम पॉलिटिकल हस्ती के तौर पर उभरे हैं. किसी भी ईरानी लीडर के लिए ऐसे दुश्मन से सीधे बात करना आसान काम नहीं है, जिसे दशकों से ‘ग्रेट सैटन’ (बड़ा शैतान) कहा जाता रहा हो और जिसने इस हफ्ते की शुरुआत तक ईरान को काफी मिलिट्री और सिविलियन नुकसान पहुंचाया हो.
इस्लामाबाद में US-ईरान बातचीत का नाजुक राजनीतिक माहौल पिछले 48 घंटों में साफ दिख रहा है, जिसमें लेबनान पर इजराइली हमलों को लेकर तनाव बना हुआ है. हालांकि इजराइल पीएम ने बैरूत के साथ सीजफायर को लेकर संदेश दिए हैं, जिसके बाद ही ईरानी डेलीगेशन पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ. अमेरिका के साथ बातचीत करने आए इस डेलिगेशन में करीब 86 सदस्य शामिल हैं. गालिबाफ के साथ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी पुहुंचे हैं, लेकिन इस वार्ता का नेतृत्व गालिबाफ कर रहे हैं. आइये जानते हैं उनको आखिर ये जिम्मेदारी क्यों दी गई है?
ईरानी डेलिगेशन पाकिस्तान लैंड होने के बाद
कौन हैं मोहम्मद बाघेर गालिबाफ?मोहम्मद बाघेर गालिबाफ का जन्म 23 अगस्त 1961 में ईरान के तोरकाबेह में हुए था. वह एक ईरानी कंजर्वेटिव पॉलिटिशियन, पूर्व मिलिट्री कमांडर और 2020 से ईरान की पार्लियामेंट (मजलिस) के मौजूदा स्पीकर हैं. 64 साल की उम्र में वह एक प्रैक्टिकल प्रिंसिपलिस्ट हैं जिनके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से गहरे संबंध हैं.
मिलिट्री और शुरुआती करियर: वह 1979 की क्रांति के बाद बासिज और IRGC में शामिल हुए और ईरान-इराक युद्ध (19801988) के दौरान यूनिट्स की कमान संभाली. बाद में उन्होंने IRGC एयरोस्पेस फोर्स (19972000) को लीड किया और ईरान की नेशनल पुलिस (20002005) के चीफ के तौर पर काम किया. गालिबफ के पास पॉलिटिकल ज्योग्राफी में PhD है और वह एक सर्टिफाइड पायलट हैं.

पॉलिटिकल करियर: वह तेहरान के मेयर (20052017) थे, जहां उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्बन डेवलपमेंट पर ध्यान दिया. वह चार बार (2005, 2013, 2017, 2024) प्रेसिडेंट के लिए चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. पार्लियामेंट स्पीकर बनने से पहले उन्होंने एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल (20172020) में काम किया, जहां वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में भी रहे. उनके करियर में विरोध प्रदर्शनों (जैसे, 1999 के स्टूडेंट प्रदर्शन) और कुछ भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं.
क्या गालिबाफ करा पाएंगे समझौता?मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ईरान में एक कट्टर कंज़र्वेटिव और एक अहम लीडर हैं, खासकर कई टॉप अधिकारियों को हटाए जाने के बाद वह टॉप लीडरशिप में गिने जा रहे हैं. तेहरान के मेयर के तौर पर उनके काम के आधार पर उन्हें एक प्रैग्मैटिस्ट (ऐसा इंसान जो प्रैक्टिकल नतीजों पर ध्यान देता है) के तौर पर भी देखा जाता है. इस वजह से वह ईरान में कट्टर कंजर्वेटिव और ज़्यादा मॉडरेट या रिफॉर्मिस्ट ग्रुप्स के बीच एक ब्रिज का काम कर सकते हैं. उनके IRGC के साथ करीबी रिश्ते उन्हें ईरान की सरकार में एक अहम इंसान बनाते हैं.
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