जंग की आहट खत्म, तेल के दाम कम! क्रूड ऑयल में 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट
TV9 Bharatvarsh April 11, 2026 01:43 PM

जब से अमेरिका ने ईरान के दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया है. उसके बाद से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो कच्चे तेल की कीमतों में बीते हफ्ते 13 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है. जोकि साल 2020 के बाद यानी 6 साल के बाद सबसे बड़ी वीकली गिरावट है. जहां ब्रेंट क्रूड के दाम 95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं. जबकि डब्ल्यूटीआई के दाम अब भी 96 डॉलर प्रति बैरल पर बने हुए हैं. फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल के बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है, और कीमतें अब भी मिडिल ईस्ट वॉर से पहले के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा हैं.

अब सबका ध्यान इस बात पर है कि इस हफ्ते घोषित किया गया सीजफायर कितना टिकाऊ साबित होगा, और क्या कोई ऐसी स्थायी शांति स्थापित हो पाएगी जिससे ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के रास्ते ऊर्जा की आपूर्ति फिर से शुरू हो सके. इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से होने वाला आवागमन अभी भी मुख्य रूप से तेहरान से जुड़े जहाजों तक ही सीमित है.

क्या जारी रहेगी ईरानी तेल पर छूट

रैपिडन एनर्जी ग्रुप के अध्यक्ष बॉब मैकनैली ने ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यह बिकवाली (sell-off) बेवजह है और इसके जल्द ही पलटने की संभावना है. उन्होंने आगे कहा कि अब जब हम एक बुरे सपने जैसे हालात का सामना कर रहे हैं, तो लोग यह मानना ​​चाहते हैं कि यह सब जल्द ही खत्म हो जाएगा, इसलिए वे मीठी बातों और ज़ुबानी आश्वासनों पर भरोसा कर रहे हैं. तेल बाजार इस बात पर भी नजर रखे हुए है कि क्या अमेरिका उन प्रतिबंधों में छूट (waiver) की अवधि बढ़ाएगा, जिसके तहत टैंकरों में पहले से ही लदे रूसी कच्चे तेल को खरीदने की अनुमति मिली हुई है.

इस मामले से जुड़े जानकारों के मुताबिक, एशिया के कई देश—जहां हाल के हफ़्तों में ईंधन की किल्लत देखने को मिली है—अमेरिकी वित्त विभाग पर इस छूट को जारी रखने का दबाव डाल रहे हैं. मौजूदा छूट की अवधि वाशिंगटन के समय के अनुसार आधी रात के ठीक बाद खत्म हो जाएगी. उम्मीद है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस शनिवार से इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत का नेतृत्व करेंगे.

इस हफ्ते ईरान के हमलों का सिलसिला जारी रहा, जिससे इस क्षेत्र के ऊर्जा-बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और तेल की आपूर्ति पर और भी बुरा असर पड़ा. गुरुवार देर रात सऊदी अरब ने बताया कि इन हमलों के कारण उसकी ‘पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन’ से होने वाले तेल के प्रवाह में कमी आई है. इसी पाइपलाइन का इस्तेमाल करके सऊदी अरब ‘लाल सागर’ (Red Sea) के रास्ते तेल का निर्यात करता है.

रिजर्व निकालने को मजबूर हुए देश

मध्य-पूर्व के कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भर रहने वाले देशों ने अब अपने तेल के भंडार (inventories) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बताया कि मई महीने में जापान अपने रणनीतिक तेल भंडार से लगभग 20 दिनों की जरूरत के बराबर तेल जारी करेगा. चीन की सरकारी रिफाइनरियों को अपने वाणिज्यिक तेल भंडारों का इस्तेमाल करने की हरी झंडी दे दी गई है.

जबकि भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी ने अपने भंडारों को व्यवस्थित रखने के लिए पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री की सीमा तय करना शुरू कर दिया है. हालांकि पूरे मिडिल ईस्ट में दो हफ्ते का सीजफायर मोटे तौर पर लागू था, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगातार बंद रहना और लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच चल रही लड़ाई से बातचीत के और पेचीदा होने का खतरा पैदा हो गया था.

जुबानी वॉर अब भी जारी

ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि तेहरान के पास एकमात्र ताकत “इंटरनेशनल वॉटररूट्स का इस्तेमाल करके दुनिया से थोड़े समय के लिए जबरदस्ती वसूली करना” है — यह होर्मुज की ओर एक इशारा था — और उन्होंने ऐलान किया कि “ईरानियों को शायद यह एहसास नहीं है कि उनके पास खेलने के लिए कोई पत्ता ही नहीं बचा है.

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाघेर गसलिबफ ने X पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के लिए, लेबनान में सीजफायर एक ऐसा कदम है जिसे “बातचीत शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए.

ट्रंप ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि अगर बातचीत नाकाम होती है, तो नए हमले करने के लिए अमेरिकी जंगी जहाजों में “सबसे बेहतरीन गोला-बारूद” फिर से भरा जा रहा है. दूसरी तरफ, रूस के साथ बातचीत करने वाले यूक्रेन के मुख्य वार्ताकार ने कहा कि उन्हें एक संभावित शांति समझौते की दिशा में कुछ प्रगति नजर आ रही है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.