भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से किसानों को नुकसान पहुंच सकता है, अखिल भारतीय किसान सभा ने किया आगाह
Navjivan Hindi April 12, 2026 12:42 AM

अखिल भारतीय किसान सभा (अभाकिस) ने शनिवार को आगाह किया कि भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता से कृषि क्षेत्र आयात के लिए खुल सकता है और घरेलू किसानों को नुकसान पहुंच सकता है। किसान संगठन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, ऋण माफी और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सुरक्षा उपायों की अपनी मांग दोहराई।

अखिल भारतीय किसान सभा (अभाकिस) की 90वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात ने कहा कि यह देश का सबसे बड़ा किसान संगठन बन गया है। उन्होंने कहा कि अभाकिस ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और सामंती ताकतों के खिलाफ किसानों को संगठित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

प्रकाश करात ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अब तक, किसान सभा ने किसानों के बुनियादी मुद्दों (भूमि, लाभकारी मूल्य और ऋण राहत) को लगातार उठाया है।’’ सीपीएम नेता ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संदर्भ में, भारत के कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट-प्रेरित नीतियों और बाहरी दबाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जारी बातचीत से संकेत मिल रहे हैं कि कुछ कृषि उत्पादों के आयात की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र को खोलने से भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्रकाश करात ने कहा, ‘‘अब तक कृषि उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं थी। लेकिन हमें जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे पता चलता है कि कुछ कृषि उत्पादों के आयात पर सहमति बन सकती है।’’ उन्होंने कहा कि अभाकिस संयुक्त किसान मोर्चा के तहत अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर उन नीतियों का विरोध कर रहा है जिन्हें किसानों के लिए हानिकारक माना जाता है।

अभाकिस अध्यक्ष अशोक धवले ने कहा कि वर्तमान कृषि स्थिति भूमि अधिग्रहण, बढ़ती लागत, निजीकरण के उपायों और कमजोर ग्रामीण सहायता प्रणालियों के कारण बढ़ते संकट से ग्रस्त है। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार उत्पादन लागत का डेढ़ गुना एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि ऋण माफी, पेंशन, भूमि अधिकार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की मांग दोहराई।

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए धवले ने कहा कि दिल्ली की सीमा पर एक साल तक चला विरोध प्रदर्शन स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक था और इसने केंद्र सरकार को इन कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर किया था। इस कार्यक्रम में लखनऊ में 1936 में अभाकिस की स्थापना को याद किया गया और प्रमुख कृषि संघर्षों में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

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