दिल्ली : दिल्ली में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए कई तरह के नए नियम बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में ऐप बेस्ड ग्रोसरी और फूड डिलीवरी और बाइक-कैब सर्विस देने वाली कंपनियां (एग्रीगेटर) इस साल से अपने फ्लीट में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों को शामिल नहीं कर पाएंगी। इसके अलावा, साल 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा को ही नए रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिलेगी। दिल्ली सरकार द्वारा जारी नई ईवी पॉलिसी के ड्राफ्ट में ये प्रस्ताव रखे गए हैं।
ड्राफ्ट में क्या-क्या प्रस्तावित है
दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030 के ड्राफ्ट में प्रस्ताव किया गया है, ''इस साल एक जनवरी से एग्रीगेटर और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा ऑपरेट की जाने वाली टू-व्हीलर्स और हल्के मालवाहक वाहनों के मौजूदा फ्लीट में पूरी तरह से पेट्रोल या डीजल पर चलने वाले किसी भी पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहन को शामिल नहीं किया जाएगा।'' हालांकि, एग्रीगेटर को फ्लीट में बीएस-6 वाले दोपहिया वाहनों को शामिल करने की अनुमति 31 दिसंबर, 2026 तक होगी, जिसके बाद उन्हें अपने फ्लीट को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना अनिवार्य होगा।
इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर मिलेगी 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि
इस पॉलिसी में ऑटो-रिक्शा सहित यात्री इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलरों के लिए प्रोत्साहन राशि का भी प्रस्ताव किया गया है। इसमें कहा गया कि नई नीति की अधिसूचना की तारीख से पहले साल में 50,000 रुपये, दूसरे साल में 40,000 रुपये और तीसरे साल में 30,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके। ये प्रोत्साहन राशि पुराने सीएनजी ऑटो-रिक्शा को बदलने के साथ-साथ दिल्ली में रजिस्टर नए ऑटो-रिक्शा पर भी लागू होगी।
राजधानी में प्रदूषण के स्तर को कम करना उद्देश्य
ये प्रावधान उन वाहन श्रेणियों पर केंद्रित हैं जिनका इस्तेमाल ज्यादा होता है जैसे- टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और मालवाहक वाहन, जो रोजाना व्यापक संचालन के कारण प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ड्राफ्ट पॉलिसी में ये भी स्पष्ट किया गया है कि 'दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाता योजना (2023)' के अन्य प्रावधान यथावत लागू रहेंगे। एग्रीगेटर फ्लीट और ऑटो-रिक्शा पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस पॉलिसी का उद्देश्य ज्यादा इस्तेमाल वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और राजधानी में प्रदूषण के स्तर को कम करना है।