बिजली बिल बढ़ने से रोकेगा कोल इंडिया! कोयले की कीमत पर लिया बड़ा फैसला
TV9 Bharatvarsh April 12, 2026 07:43 PM

सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड, कंज्यूमर को कोयले की बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए इनपुट कॉस्ट में हो रही बढ़ोतरी का बोझ खुद उठा रही है. ऐसा तब हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण विस्फोटक और औद्योगिक डीजल जैसे जरूरी इनपुट की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. कंपनी ने कहा कि उसने इस बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ कंज्यूमर पर न डालने का फैसला किया है. कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा किया गया, तो कोयले पर निर्भर दूसरे सेक्टरों पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है.

इसके अलावा, कंपनी अपनी खदानों में काम करने वाले ठेकेदारों को भी डीजल की बढ़ी हुई कीमतों की भरपाई कर रही है. अमोनियम नाइट्रेट की कीमतें—जो ओपनकास्ट माइनिंग (खुली खदानों में खुदाई) में इस्तेमाल होने वाले कुल विस्फोटकों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होती हैं—1 अप्रैल तक युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपए प्रति टन हो गई हैं.

इसके चलते मार्च के आखिर तक विस्फोटकों की औसत लागत लगभग 26 प्रतिशत बढ़कर 49,800 रुपए प्रति टन के करीब पहुंच गई है. कोल इंडिया की सहायक कंपनियां हर साल लगभग 0.9 मिलियन टन विस्फोटकों का इस्तेमाल करती हैं. कंपनी ने बताया कि इस पूरी लागत का बोझ कोल इंडिया खुद उठा रही है.

उठाए हैं कई कदम

डीजल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं. मार्च के मध्य में जो कीमत लगभग 92 रुपए प्रति लीटर थी, वह लगभग 54 प्रतिशत बढ़कर 142 रुपए प्रति लीटर हो गई है. मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने लगभग 4,19,000 किलोलीटर डीजल का इस्तेमाल किया. कॉस्ट का दबाव होने के बावजूद, कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति को किफायती बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें चुनिंदा ई-नीलामियों में रिजर्व प्राइस को कम करना, नीलामी की आवृत्ति बढ़ाना और बाजार में कोयले की अधिक मात्रा उपलब्ध कराना शामिल है. इन उपायों का उद्देश्य कोयले पर निर्भर उद्योगों और उपभोक्ताओं को ऊर्जा की बढ़ती लागत के बुरे असर से बचाना है. कंपनी का लक्ष्य है कि ईंधन बाजारों में व्यापक उतार-चढ़ाव के बावजूद कोयले की कीमतों को स्थिर बनाए रखा जाए.

अमोनियम नाइट्रेट की कीमत में तेजी

अधिकारियों ने बताया कि अगर बढ़ती कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला गया, तो इसका असर एक के बाद एक कई सेक्टरों पर पड़ेगा. इसके अलावा, कंपनी CIL की खदानों में काम करने वाले उन ठेकेदारों को भी औद्योगिक डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतों की भरपाई कर रही है, जो इसे बड़ी मात्रा में खरीदते हैं. पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने से पहले, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के लिए अमोनियम नाइट्रेट (AN) की कीमतें अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक स्थिर बनी हुई थीं.

इसके बाद 1 मार्च 2026 को ये कीमतें बढ़कर 50,500 रुपए प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गईं, और तब से इनमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अमोनियम नाइट्रेट की कीमत में इस तेज़ी से बढ़ोतरी का सीधा असर उन विस्फोटकों की लागत पर पड़ा, जिनका इस्तेमाल CIL ब्लास्टिंग ऑपरेशन्स में बड़ी मात्रा में करता है, ताकि ऊपरी मिट्टी (overburden) को हटाया जा सके और कोयले की परतें (coal seams) सामने आ सकें. इसके परिणामस्वरूप, विस्फोटकों की औसत लागत फरवरी 2026 में 39,588 रुपये प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर मार्च के अंत तक लगभग 26 प्रतिशत बढ़कर 49,783 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई, ऐसा बताया गया है.

कोयले की आरक्षित कीमत में की कमी

अभी-अभी खत्म हुए वित्त वर्ष 2025-26 में, डीजल की खपत लगभग 4.19 लाख किलोलीटर (KL) रही. एक KL 1,000 लीटर के बराबर होता है. ऐसे समय में जब ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, कीमतों में आए झटकों को खुद झेलने के अलावा, CIL की कुछ सहायक कंपनियों ने ‘सिंगल विंडो मोड एग्नॉस्टिक ई-ऑक्शन’ में कोयले की आरक्षित कीमत (reserve price) भी कम कर दी है. अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने नीलामी की बारंबारता और नीलामी के लिए रखे जाने वाले कोयले की मात्रा भी बढ़ा दी है. CIL का इरादा देश के नागरिकों को यह ‘सूखा ईंधन’ (कोयला) किफायती कीमत पर उपलब्ध कराना है, ताकि इसके परिणामस्वरूप बढ़ने वाली लागतों को नियंत्रित किया जा सके.

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