क्योंकि 2029 के चुनावों से पहले ये बदलाव भारत की फेडरल स्ट्रक्चर को रिशेप कर सकता है। Recent trends और रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनसंख्या आधारित बढ़ोतरी से UP, बिहार जैसे राज्य फायदे में रहेंगे, जबकि दक्षिण की सफल फेमिली प्लानिंग 'सजा' बन सकती है। आज हम देखते हैं – परिसीमन पर किसने क्या कहा।
परिसीमन क्या है और क्यों हो रहा है विवाद?परिसीमन यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का नया निर्धारण। आबादी के हिसाब से सीटें बांटी जाती हैं ताकि हर वोट का बराबर वजन हो।
अभी फ्रीज 1971 की जनगणना पर आधारित है (84वें संशोधन के बाद 2026 तक बढ़ाया गया)। अब 2011 सेंसस या नई जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे महिला आरक्षण (33%) को प्रभावी बनाया जाएगा। लेकिन दक्षिणी राज्य चिंतित हैं – उनकी आबादी कम बढ़ी है, तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी घट सकता है।
क्या परिसीमन दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत छीन लेगा? मुख्य मुद्दे:
-उत्तर के राज्यों (UP, Bihar) में सीटें ज्यादा बढ़ेंगी।
-दक्षिण (Tamil Nadu, Telangana) को "सजा" का डर।
-प्रक्रिया में पारदर्शिता और परामर्श की कमी का आरोप।
स्टालिन की चेतावनी : आप एक ऐसा तमिलनाडु देखेंगे जो पहले कभी नहीं देखातमिलनाडु के CM एमके स्टालिन ने मंगलवार को साफ चेतावनी दी। अगर परिसीमन से दक्षिण की तुलना में उत्तर की राजनीतिक शक्ति असंगत बढ़ाई गई, तो बड़े आंदोलन होंगे। X (Twitter) पर पोस्ट किए वीडियो में स्टालिन ने 1950-60 के DMK आंदोलनों की याद दिलाई। बोले, “यह कोई धमकी नहीं, बल्कि चेतावनी है।”
उन्होंने कहा :
चुनाव और सत्ता गौण हैं, सिद्धांत और राज्यों के अधिकार मायने रखते हैं।
केंद्र राज्यों या पार्टियों से बिना परामर्श के आगे बढ़ रहा है।
प्रक्रिया गुप्त तरीके से चल रही है, कोई स्पष्टीकरण नहीं।
तमिलनाडु की जनसंख्या नियंत्रण सफलता को "सजा" बताया।
PM मोदी से कोई आश्वासन नहीं मिला कि दक्षिण प्रभावित नहीं होगा।
स्टालिन का टोन aggressive था – आत्मसम्मान वाले लोग सिद्धांतों के लिए लड़ते हैं। ये बयान दक्षिण में resonance पैदा कर रहा है।
रेवंत रेड्डी का हाइब्रिड मॉडल : सिर्फ पॉपुलेशन नहीं, जीएसडीपी भी काउंट होतेलंगाना CM ए. रेवंत रेड्डी ने BR अंबेडकर जयंती पर बात की। चेतावनी दी – अगर सीटों में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई, तो दक्षिण की महिलाओं, SC/ST को "अन्याय" होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र UP और गुजरात जैसे राज्यों में सीटें बढ़ाने के लिए दक्षिण की कीमत चुकाना चाहता है।
रेवंत का प्रपोजल – Hybrid Model:
-50% सीटें आनुपातिक (population-based) बढ़ाएं।
-बाकी 50% राज्य के GSDP (सकल घरेलू उत्पाद) से लिंक करें।
रेवंत ने PM मोदी को लेटर भी लिखा है। बोले – दक्षिणी राज्य मिलकर विरोध करें। ये मॉडल नॉर्थ-साउथ बैलेंस बनाए रख सकता है, क्योंकि दक्षिण आर्थिक रूप से मजबूत है।
सोनिया गांधी का हमला : "परिसीमन असली मुद्दा, महिला आरक्षण नहीं"कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा – संसद के विशेष सत्र में बिल लाने का असली मकसद परिसीमन है, महिला आरक्षण नहीं। उन्होंने इसे "अत्यंत खतरनाक" और "संविधान पर हमला" बताया।
सोनिया के मुख्य पॉइंट्स :
- लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी सिर्फ गणितीय नहीं, राजनीतिक न्यायसंगत होनी चाहिए।
- PM मोदी जाति जनगणना को delay करने और पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।
- परिसीमन के साथ जाति जनगणना जरूरी है, वरना हाशिए के समुदायों का डेटा अधूरा रहेगा।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं : जयराम रमेश से उद्धव ठाकरे तक (H2)
जयराम रमेश (कांग्रेस):
- केंद्र ने सांसदों के साथ बिल का मसौदा शेयर नहीं किया – "लोकतंत्र का मजाक"।
- मोदी की "बुलडोजर मानसिकता" का आरोप।
- तमिलनाडु और बंगाल चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग खारिज करने पर नाराजगी।
डेरेक ओ’ब्रायन (TMC):
- स्टालिन की गोपनीयता वाली चिंता का समर्थन।
- संसद का उपहास उड़ाने का आरोप।
महुआ मोइत्रा (TMC) और उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT):
- अपने राज्यों (पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र) में राजनीतिक शक्ति घटने का डर जताया।
मनोज झा (RJD):
- परिसीमन को जाति जनगणना से जोड़ा।
- बिना सटीक डेटा के सीमाएं redraw करना "आत्मा विहीन लोकतंत्र" जैसा।
ये बयान दिखाते हैं कि मुद्दा सिर्फ दक्षिण तक सीमित नहीं – कई विपक्षी दल इसे फेडरलिज्म पर हमला मान रहे हैं।
परिसीमन के संभावित प्रभाव: उत्तर फायदे में, दक्षिण चिंतित क्यों?Recent reports के अनुसार:
- लोकसभा सीटें ~816 (कुछ रिपोर्ट्स में 850) तक बढ़ सकती हैं।
- 2011 सेंसस आधारित प्रो-राटा बढ़ोतरी से उत्तर के populous राज्य ज्यादा सीटें पा सकते हैं।
- दक्षिण ने जनसंख्या स्थिर रखी, इसलिए relative loss का डर।
- महिला आरक्षण के 273 सीटें नई बढ़ी हुई सीटों में आरक्षित हो सकती हैं।
संभावित फायदे/नुकसान (Bullet Points):
- उत्तर के राज्य (UP, Bihar) :** ज्यादा सीटें, ज्यादा political power।
- दक्षिण के राज्य : मौजूदा proportion घट सकता है अगर pure population formula लागू हुआ।
- SC/ST और महिलाओं के लिए नए आरक्षण – लेकिन डेटा की सटीकता पर सवाल।
- PM मोदी ने आश्वासन दिया – कोई राज्य सीटें नहीं खोएगा, सभी को फायदा।
लेकिन विपक्ष कह रहा है – आश्वासन पर्याप्त नहीं, hybrid या balanced formula चाहिए।
आगे क्या? क्या होगा समाधान?सरकार का प्लान – तीन बिल : Constitution (131st Amendment), Delimitation Bill, और UT Laws Amendment। स्पेशल सत्र में पेश होने वाले हैं।
विपक्ष मांग कर रहा है:
- सर्वदलीय चर्चा और consensus।
- जाति जनगणना के साथ परिसीमन।
- GSDP या performance-based elements शामिल करना।
ये विवाद 2029 चुनावों से पहले भारत की राजनीति को redefine कर सकता है। दक्षिण के आत्मसम्मान और उत्तर की जनसंख्या reality के बीच बैलेंस ढूंढना चुनौती है।
परिसीमन सिर्फ सीटें बढ़ाने का मामला नहीं – ये फेडरलिज्म, न्याय और लोकतंत्र का सवाल है। स्टालिन की चेतावनी, सोनिया का हमला, रेवंत का मॉडल – सब एक बात कह रहे हैं : प्रक्रिया transparent, inclusive और equitable होनी चाहिए।
अगर सही तरीके से किया गया, तो ये भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। वरना, उत्तर-दक्षिण divide और गहरा हो सकता है।