दिल्ली से देहरादून का सफर अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज, आसान और सुविधाजनक हो गया है. यह सब दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद हुआ है. इस एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लोग बिना ट्रैफिक और रुकावट के अपनी मंजिल तक जल्दी पहुंच सकें. खास बात यह है कि इससे न सिर्फ सफर का समय कम होगा, बल्कि ड्राइविंग एक्सपीरियंस भी ज्यादा स्मूद और आरामदायक होगा. हालांकि, तेज स्पीड के साथ सेफ्टी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, इसलिए इस एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग तरह की गाड़ियों के लिए स्पीड लिमिट तय की गई है.
इस एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहन जैसे कार, जीप और छोटे पर्सनल वाहन के लिए मैक्सिमम स्पीड लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है. इसका मतलब है कि चालक इससे ज्यादा तेज गाड़ी नहीं चला सकते. वहीं, भारी वाहन जैसे ट्रक और बसों के लिए स्पीड लिमिट कम रखी गई है, जो करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटा है. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि भारी वाहनों को कंट्रोल करने में ज्यादा समय लगता है और उनकी ब्रेकिंग दूरी भी ज्यादा होती है, जिससे तेज स्पीड पर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है.
एक्सप्रेसवे पर मिनिमम स्पीड का पालन करना भी जरूरी होगा, ताकि काफी कम स्पीड से चलने वाली गाड़ियां बाकी ट्रैफिक के लिए मुसीबत न बनें. इससे ट्रैफिक का फ्लो बना रहता है और अचानक ब्रेक लगाने जैसी स्थितियों से बचाव होता है. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर आपको 4 टोल प्लाजा मिलेंगे और अगर फास्टैग एनुअल पास है तो फिर आपकी यात्रा तय शर्तों के साथ फ्री हो जाएगी.
सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेसवे पर हाई-टेक निगरानी सिस्टम लगाए गए हैं. इसमें स्पीड कैमरे, सीसीटीवी कैमरे और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम शामिल हैं, जो वाहनों की स्पीड पर नजर रखते हैं. अगर कोई वाहन तय सीमा से ज्यादा तेज चलता है तो उसका चालान अपने आप कट सकता है. यानी यहां नियम तोड़ना आसान नहीं होगा और हर एक्टिविटी पर नजर रखी जाएगी.
प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी का उद्देश्य तेज लेकिन सुरक्षित यात्रा करना है. इसलिए ड्राइवरों को लेन ड्राइविंग, सीट बेल्ट, ओवरटेकिंग के नियम और ट्रैफिक साइन का भी पालन करना जरूरी है. एक्सप्रेसवे पर कई जगह एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स भी बनाए गए हैं, जहां स्पीड नियंत्रित रखने की खास जरूरत होती है.
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