भोजन से पहले जल छिड़कने की परंपरा के पीछे के कारण
Gyanhigyan April 16, 2026 09:42 AM
भोजन से पहले जल छिड़कने की परंपरा

हिंदू धर्म में विभिन्न प्रकार की परंपराएं और रीति-रिवाज हैं, जिनमें से कई का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। आपने देखा होगा कि जब बड़े बुजुर्ग भोजन आरंभ करते हैं, तो वे पहले थाली के चारों ओर पानी छिड़कते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि यह जल छिड़कने का कारण क्या है? आइए, इस पर चर्चा करते हैं।


जल छिड़कने का महत्व

भोजन की थाली के चारों ओर जल छिड़कने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में इसे आमचन और चित्र आहुति कहा जाता है, जबकि तमिलनाडु में इसे परिसेशनम के नाम से जाना जाता है।


धार्मिक दृष्टिकोण

भोजन से पहले जल छिड़कने का एक महत्वपूर्ण धार्मिक कारण है। यह अन्न देवता के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है। इससे अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं, और उनके आशीर्वाद से भक्तों के घर में हमेशा समृद्धि बनी रहती है।


वैज्ञानिक दृष्टिकोण

जल छिड़कने का एक वैज्ञानिक कारण भी है। प्राचीन समय में लोग अक्सर जमीन पर बैठकर भोजन करते थे, जिससे भोजन की खुशबू से कीड़े-मकोड़े आकर्षित होते थे। थाली के चारों ओर पानी छिड़कने से ये कीड़े भोजन में नहीं आ पाते थे। इसके अलावा, यह धूल-मिट्टी को भी रोकने में मदद करता था।


अन्य खाने की परंपराएं

भोजन से जुड़ी एक और परंपरा यह है कि लोग भोजन शुरू करने से पहले उसका कुछ हिस्सा थाली में या बाहर रख देते हैं। यह भगवान को पहला भोग अर्पित करने का तरीका होता है। कुछ लोग इसे अलौकिक शक्तियों या पूर्वजों के प्रति सम्मान के रूप में भी मानते हैं।


जब हम बाहर किसी पार्क या खुली जगह पर भोजन करते हैं, तो हम भोजन का कुछ हिस्सा वहां डाल देते हैं। इससे बुरी शक्तियां भोजन की खुशबू से आकर्षित नहीं होतीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि हमने यह हिस्सा उनके सम्मान में दिया है।


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