8th Pay Commission: 18000 की बेसिक सैलरी होगी 69,000? क्या सैलरी इंक्रीमेंट से ज़्यादा होगी?
Varsha Saini April 16, 2026 06:05 PM

PC: navarashtra

सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। आने वाले सालों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और बेनिफिट्स में बड़े बदलाव हो सकते हैं। कर्मचारी यूनियनों ने आठवें पे कमीशन को अपनी मांगें सौंपी हैं। इसने मिनिमम वेज में कई गुना बढ़ोतरी और पेंशन से लेकर छुट्टी तक हर चीज़ में बड़े बदलाव की सिफारिश की है।

नेशनल काउंसिल – जॉइंट एडवाइजरी मैकेनिज्म की ड्राफ्टिंग कमेटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। सबसे अहम मांग यह है कि कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाकर ₹69,000 की जाए। अभी सातवें पे कमीशन के तहत यह सिर्फ ₹18,000 है। बढ़ती महंगाई और मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कमेटी ने फिटमेंट फैक्टर 3.83 तय करने की सिफारिश की है। अगर सरकार इसे मान लेती है, तो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में काफी बढ़ोतरी होगी। ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि ये सभी बदलाव 1 जनवरी, 2026 तक लागू कर दिए जाएं, ताकि कर्मचारियों को इस देरी से परेशानी न हो।

सालाना सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होनी चाहिए?

एक और ज़रूरी मांग यह है कि सालाना सैलरी में बढ़ोतरी को बढ़ाकर 6% किया जाए। हालांकि अभी यह रेट कम है, लेकिन कमिटी का मानना ​​है कि हर साल बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए 6% की बढ़ोतरी ज़रूरी है। कमिटी ने मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर को आसान बनाने का भी सुझाव दिया है। अभी 18 अलग-अलग लेवल हैं, जिन्हें घटाकर सिर्फ़ सात बड़े लेवल कर देना चाहिए। इससे कर्मचारियों का प्रमोशन बढ़ेगा और यह पक्का होगा कि उनकी तरक्की में कोई रुकावट न आए। इस नए स्ट्रक्चर के तहत, मिड-लेवल कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹1.35 लाख से ₹2.15 लाख तक हो सकती है।

रिटायरमेंट के बाद ज़्यादा पेंशन

सैलरी के अलावा, पुरानी पेंशन स्कीम सबसे ज़्यादा चर्चा का मुद्दा है। नेशनल काउंसिल ने 1 जनवरी, 2004 के बाद सर्विस में आए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम को फिर से शुरू करने की मांग की है। कमिटी ने प्रस्ताव दिया है कि रिटायरमेंट पेंशन आखिरी सैलरी का 67% होनी चाहिए और फैमिली पेंशन 50% तय होनी चाहिए। इसने यह भी कहा कि हर पांच साल में पेंशन का रिव्यू किया जाना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि सीनियर सिटिज़न्स को पैसे की दिक्कत न हो।

हाउस रेंट अलाउंस बढ़ाने की मांग

रिपोर्ट में एम्प्लॉई बेनिफिट्स पर भी ज़रूरी नई जानकारी है। इसमें कहा गया है कि हाउस रेंट अलाउंस कम से कम 30 परसेंट बढ़ाया जाना चाहिए, और मेट्रो के लिए इससे ज़्यादा बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है। इसमें ड्यूटी के दौरान मरने वाले एम्प्लॉई के परिवारों के लिए ज़्यादा मुआवज़ा और बेहतर इंश्योरेंस कवर की भी मांग की गई है। इसमें महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने और पिता बनने वाले पुरुषों के लिए ज़्यादा छुट्टी की भी मांग की गई है। इसके अलावा, इसमें पैरेंटल केयर के लिए स्पेशल लीव की भी मांग की गई है।

आगे क्या होगा?

नेशनल काउंसिल कई एम्प्लॉई एसोसिएशन और यूनियन को रिप्रेजेंट करती है, इसलिए आठवें पे कमीशन के रिव्यू में उनकी मांगों को बहुत ज़रूरी माना जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये सिर्फ़ सिफारिशें हैं। सरकार इन पर विचार करेगी और कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद ही कोई आखिरी फ़ैसला लिया जाएगा। अगर सरकार इनमें से कुछ मांगें भी मान लेती है, तो इससे लाखों सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉई और पेंशनर्स के रहने की स्थिति में काफ़ी सुधार होगा। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख़ और साफ़ होने की उम्मीद है।

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