दिल्ली से सटे जिस इलाके में कभी धूल उड़ती पगडंडियां, कीकर के पेड़ और खेत-खलिहान हुआ करते थे, वह आज मल्टीनेशनल कंपनियों और गगनचुंबी इमारतों का ग्लोबल हब बन चुका है. 17 अप्रैल 1976 को यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत जब नोएडा की नींव रखी गई थी, तब इसका मुख्य मकसद दिल्ली पर बढ़ते उद्योगों के भारी दबाव को कम करना था. लेकिन, अपनी स्थापना के 50 साल पूरे कर चुका यह शहर अब सिर्फ फैक्ट्रियों का ठिकाना नहीं रह गया है. नोएडा ने बीते पांच दशकों में जो कायाकल्प देखा है, वह देश के रियल एस्टेट और आर्थिक विकास की एक बेमिसाल कहानी बन चुका है.
उद्योगों के लिए बसा शहर, कैसे बन गया सबका आशियाना?शुरुआती दौर में नोएडा को पूरी तरह से एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप के रूप में डिजाइन किया गया था. लेकिन 1990 के दशक में जैसे-जैसे यहां बिजली, पानी और सड़कों का बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ, तस्वीर बदलने लगी. बेहतर कनेक्टिविटी ने लोगों को यहां बसने के लिए आकर्षित किया. आज आलम यह है कि शहर की कुल जमीन का 37.45 फीसदी हिस्सा आवासीय प्रोजेक्ट्स के पास है, जबकि औद्योगिक इकाइयों का दायरा सिमटकर 18.37 फीसदी रह गया है. दिल्ली में प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतों के कारण, आज एक फैक्ट्री वर्कर से लेकर मल्टीनेशनल कंपनी के अधिकारी तक, हर वर्ग के लिए नोएडा में घर खरीदने के विकल्प मौजूद हैं.
ग्लोबल IT हब बनने की इनसाइड स्टोरीनोएडा अब सिर्फ एक रिहायशी इलाका नहीं, बल्कि देश का प्रमुख आईटी कॉरिडोर है. आज शहर में करीब एक लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश हो चुका है. माइक्रोसॉफ्ट, एचसीएल, टीसीएस और एडोब जैसी वैश्विक कंपनियों ने यहां अपने रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर खोले हैं. सेक्टर-145 में अमेरिकी कंपनी एमएक्यू 500 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, जिससे हजारों नौकरियां पैदा हो रही हैं. प्राधिकरण ने भी सेक्टर-153 को खास तौर पर आईटी सेक्टर के लिए आरक्षित कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यहां रोजगार और निवेश की रफ्तार और तेज होने वाली है.
गुड़गांव सिर्फ अमीरों का, नोएडा सबकाइस ऐतिहासिक बदलाव पर बाजार के दिग्गज भी मुहर लगाते हैं. एम3एम नोएडा के डायरेक्टर यश गर्ग इस स्वर्ण जयंती के अवसर पर कहते हैं, “1976 में शुरू हुआ नोएडा आज एक सशक्त इकोनॉमिक हब बन चुका है. बाजार के रुझान इस प्रगति को बयां करते हैं. पिछले पांच वर्षों (2020-2025) में नोएडा के रेजिडेंशियल मार्केट ने लगभग 92% की शानदार बढ़त दर्ज की है. 2019 के बाद से प्रॉपर्टी की कीमतों में 150% से ज्यादा का उछाल आया है.”
गर्ग आगे स्पष्ट करते हैं कि नोएडा की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘बैलेंस्ड मार्केट मॉडल’ है. वह कहते हैं, “गुरुग्राम में सारा ध्यान केवल लक्जरी घरों पर है, जबकि नोएडा ने बेहतरीन प्लानिंग के जरिये प्रीमियम प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ मिड और अफोर्डेबल हाउसिंग के शानदार विकल्प दिए हैं. जेवर एयरपोर्ट और नए एक्सप्रेसवे नोएडा को ग्लोबल निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बनाने जा रहे हैं.”
गांवों की जमीन से कैसे खड़ा हुआ 10% GSDP का इंजन?नोएडा का विकास सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है. एयू रियल एस्टेट के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी (GSDP) में नोएडा का योगदान आज करीब 10% है. अग्रवाल कहते हैं, “छलेरा और सोरखा जैसे गांवों का आईटी कॉरिडोर में बदलना और सरफाबाद जैसे क्षेत्रों का सेक्टर 62 और 18 जैसे कमर्शियल हब के रूप में विकसित होना, यह दर्शाता है कि कैसे ग्रामीण बस्तियां बड़े आर्थिक केंद्र बन चुकी हैं.”
प्रॉपर्टी के दामों में आए उछाल पर आंकड़े देते हुए वह कहते हैं, “Q1 2020 में प्रॉपर्टी की औसत कीमतें 4,795 रुपये प्रति वर्ग फुट थीं, जो 92% बढ़कर Q1 2025 में लगभग 9,200 रुपये तक पहुंच गई हैं. जेवर एयरपोर्ट के कारण यमुना एक्सप्रेसवे बेल्ट में पहले ही 40-60% की तेजी आ चुकी है. हमारा अनुमान है कि 2027 तक प्लॉट की कीमतों में 28% और फ्लैट में 22% की और बढ़ोतरी होगी.”