महिला आरक्षण बिल से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल संसद में गिर गया। बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा में 528 सांसदों ने वोट डाले। बिलों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बहुमत नहीं मिलने से ये बिल पास 54 वोट से गिर गया।
अमित शाह बोले- प्रियंका गांधी से सीखें सदन में बोलना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर बहस का जवाब देते हुए कहा, "मैं नेता प्रतिपक्ष का भाषण सुन रहा था, यह भाषा सदन की मर्यादा के विपरीत है... अपशब्दों का प्रयोग होता है, असंसदीय शब्दों की भरमार लग जाती है... यह नेता प्रतिपक्ष का किस तरह का बर्ताव है, क्या भाषा है? क्या उन्हें लगता है कि देश उनकी यह भाषा नहीं सुन रहा? वे संविधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं... वे सत्र छोड़कर विदेश चले जाते हैं... सदन में बोलने की कला आपके यहां बहुत वरिष्ठ लोग हैं उनसे सीखें, या प्रियंका गांधी से सीख लें।"
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गृह मंत्री ने कहा कि ये कहते हैं कि यह क्रूर बिल है। महिलाओं को आरक्षण देने वाला बिल क्रूर बिल है। ये उत्तर बनाम दक्षिण करते हैं। कल इतना समझाने के बाद भी अगर यह बयान आ रहा है, तो यह जानबूझकर दिया गया बयान है।
गृह मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक का विरोध हो रहा है, हमने धारा 370 समाप्त की, उन्होंने विरोध किया, राम मंदिर बनाया, विरोध किया, CAA लाए, विरोध किया, तीन तलाक समाप्त किया, विरोध किया, GST लाए, विरोध किया, आयुष्मान भारत बनाया, विरोध किया, नया संसद भवन बनाया, विरोध किया, CDS बनाया, विरोध किया, नक्सलवाद खत्म किया, विरोध किया, एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। इन्होंने अच्छा-बुरा सोचे बिना नरेन्द्र मोदी जी जो कर रहे हैं, उसका विरोध करने का ठान लिया है।
गृह मंत्री बोले- हम महिलाओं को आरक्षण देकर रहेंगे
महिलाओं को प्रस्थापित करने के लिए, उन्हें संबल बनाने के लिए, उन्हें प्रतिनिधित्व देने के लिए, विधायी संस्थाओं में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए... जिसके विरोध का भी सामना करना पड़े, हम करेंगे, हम लड़ेंगे और महिलाओं को आरक्षण देकर रहेंगे। विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अच्छा-बुरा सोचे बगैर इन्होंने नरेंद्र मोदीजी जो कर रहे हैं, उसका विरोध करने की ठान लिए हैं। मैंने तो सोचा था कि आज महिलाओं को आरक्षण के लिए बिल आ रहा है, इसका विरोध नहीं करेंगे। लेकिन इन्होंने इसका भी विरोध किया। ये जो बिल अर्जुन राम मेघवाल जी लेकर आए हैं, इसमें लोकसभा सदस्यों की संख्या 850 तक करने की बात है। अनुच्छेद 81(3) में नवीन जनसंख्या के अनुसार परिभाषित करने के प्रावधान को समाप्त करते हैं। उन्होंने संशोधन भी गिनाए, और कहा कि सारे बदलावों का मूल उद्देश्य है कि माताओं-बहनों को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। 2023 में सर्वसम्मति से यह बिल पारित हुआ, लेकिन आज कांग्रेस पार्टी पीछे हो रही है. यह बिल मोदीजी ला रहे हैं, बिल पारित होता है तो माताओं के बीच मोदीजी का यश बढ़ेगा। मोदीजी ने बड़ा एडवर्टाइज देकर यश देने का भी कह दिया। इस सदन ने 2023 में जो 33 फीसदी आरक्षण का सदन ने फैसला किया था, उससे ये पीछे हट रहे हैं। हमारे नेता ने तो कहा कि भाई अंतरात्मा की आवाज से वोट करिए। ये नारा मोदी जी का नारा, इंदिराजी का है। यहां आत्मा ही नदारद है, अंतरात्मा कहां से लाएं।
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गृह मंत्री अमित शाह ने प्रियंका गांधी की तारीफ की
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं कांग्रेस से कहता हूं कि सिर्फ भाषण में नारे लगाने से देश का पिछड़ा वर्ग आपको हितैषी नहीं मानेगा। 1947 से 2014 तक आप ओबीसी का विरोध करते रहे। जब ओबीसी के बिना सत्ता नहीं मिलेगी, यह समझ आ गया, तब आज ओबीसी की माला जप रहे हो। यह दिखावटी प्रेम है, इस देश का पिछड़ा वर्ग भी जानता है और देश की पूरी जनता भी जानती है। और आज से देश की महिलाएं भी जानेंगी कि उनका अधिकार कांग्रेस पार्टी ने छीना।
संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान
यहां कुछ सदस्यों ने भ्रांति फैलाई कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए।
मैं यहां संविधान की नीतियों को स्पष्ट करना चाहता हूं। भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। इंडी अलायंस वाले तुष्टिकरण की राजनीति के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग खड़ी करना चाहते हैं और ये संविधान की बात करते हैं। कोई मुझे बता दे कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है।
कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और केरल... इन पांच राज्यों की 543 सीटों में वर्तमान संख्या 129 है, जिसका प्रतिशत 23.76 बनता है। अब वृद्धि के बाद जब इन पांचों राज्यों का आवंटन किया जाता है, तो सीटों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी। 816 में इसका प्रतिशत निकालेंगे तो 23.87 आएगा। पहले 23.76 प्रतिशत था और अब 23.87 होगा। किसी का कोई नुकसान नहीं होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी जाति जनगणना का विरोध किया। मोदी सरकार में ओबीसी आयोग को मान्यता मिली। बीजेपी को धर्म के आधार पर आरक्षण नामंजूर। कांग्रेस ने 1980 में मंडल आयोग के सुझाव नहीं माने। मोदी सरकार में 40 प्रतिशत मंत्री ओबीसी हैं। चुनाव में महिलाएं इनसे हिसाब मांगेगी।
गृह मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के हंगामे पर कहा एक घंटे का समय दीजिए संशोधन कर देंगे। विपक्ष समर्थन दे तो 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का संशोधन लाएंगे। जब से यह बिल आया है, तब से विपक्ष ने कुछ भ्रांतियां फैलाना शुरू किया है कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार संविधान संशोधन लेकर आई है। मैं बताना चाहता हूं कि तीन माह पहले ही हम जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुके हैं, टालने का सवाल ही नहीं है। जाति जनगणना शुरू हो चुकी है, उसका पहला चरण चल रहा है। हम जब शपथ लेते हैं तो मन से लेते हैं। जो संविधान हाथ में लेकर शपथ लिए हैं, वे उत्तर-दक्षिण का भेद कराना चाह रहे हैं। यह हम नहीं होने देंगे। दक्षिण के साथ अन्याय हो जाएगा। कल मुझे थोड़ा थय लगा कि दक्षिण बनाम उत्तर का नैरेटिव नहीं होना चाहिए। मैं स्पष्ट कर देता हूं कि दक्षिण के राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है, जितना उत्तर के राज्यों का है।

इस देश को उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव से अलग नहीं करना चाहिए
1976 में इस देश की आबादी 56.79 करोड़ थी, और आज 140 करोड़ है। 56.79 करोड़ की आबादी में जितने सांसद थे, उतने ही 140 करोड़ की आबादी में भी रखना, ये इनका (विपक्ष) मानना है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की सरकार ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया और फिर इसे फ्रीज कर दिया गया। 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी गई। इंदिरा जी प्रधानमंत्री थीं, उन्होंने कानून लाकर परिसीमन पर रोक लगाई, लेकिन आज ये कितने शक्तिशाली हैं कि विपक्ष में बैठकर परिसीमन पर रोक लगाना चाह रहे हैं। उस वक्त भी कांग्रेस ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित रखा था और आज भी कांग्रेस ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित कर रही है।
कई सारे सदस्यों ने अनेक प्रकार की आशंकाएं व्यक्त कीं कि परिसीमन अभी क्यों लाया जाए? तो मैं बता दूं कि जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया है, उसमें जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। अब ये कहते हैं कि बिल लाते समय ऐसा जिक्र क्यों किया गया? यह हमने नहीं किया। 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तब वे इसे फ्रीज करके गई थी, वह फ्रीज की गई सीटों की संख्या उठाते हैं तभी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन होता है इसलिए हम इसे लेकर आए।
गृह मंत्री ने कहा कि ऐसी 127 सीटें हैं, जहां निर्वाचन क्षेत्र में 20 लाख से ज़्यादा मतदाता हैं। यह 'एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य' के सिद्धांत की मूल भावना के विपरीत है। कुछ जगहों पर 45 लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि होता है, तो कुछ जगहों पर 6 लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि। इसका नतीजा यह होता है कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में हर वोट का मूल्य बराबर नहीं होता।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है। परिसीमन से ही SC और ST जिसकी संख्या बढ़ती है, उसकी सीटें बढ़ने का भी प्रावधान है। एक प्रकार से जो परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वह SC और ST सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं।
इस चर्चा को अगर बारीकी से कोई सुनेगा तो महिला आरक्षण के लिए जो संविधान संशोधन है, उसका किसी ने विरोध नहीं किया है। सभी ने कहा है कि यह संविधान संशोधन जो आया है, उसका हम स्वागत करते हैं। लेकिन इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है।
गृह मंत्री शाह ने बताए women reservation bill के उद्देश्य
पहला : महिला सशक्तिकरण करने वाले संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू कर 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए। दूसरा: एक व्यक्ति — एक वोट — एक मूल्य... यह सिद्धांत जो हमारे संविधान के मूल में है, जिसे संविधान सभा ने तय किया था, उस संविधान की स्पिरिट को लागू किया जाए। Edited by : Sudhir Sharma