CBSE 10th Result: रुद्रपुर की हर्षा ने रचा इतिहास, 500 में से 500 अंक पाकर बनीं देशभर में मिसाल
UPUKLive Hindi April 18, 2026 01:42 AM

उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर अपनी मेधा के कारण चर्चा में है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम घोषित होते ही रुद्रपुर में जश्न का माहौल है। यहां की रहने वाली छात्रा हर्षा ने वह करिश्मा कर दिखाया है जिसकी कल्पना अक्सर छात्र करते हैं, लेकिन उसे हकीकत में बदलना हर किसी के बस की बात नहीं होती। हर्षा ने 500 में से पूरे 500 अंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का सिर फख्र से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे राज्य का नाम देशभर में रोशन कर दिया है।

दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), रुद्रपुर की इस होनहार छात्रा के शत-प्रतिशत अंक आने की खबर जैसे ही फैली, स्कूल परिसर से लेकर हर्षा के घर तक बधाई देने वालों का तांता लग गया। दरअसल, सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं में एक-एक अंक के लिए कड़ी जद्दोजहद होती है, ऐसे में हर विषय में फुल मार्क्स लाना हर्षा की असाधारण प्रतिभा और उनकी कड़ी मेहनत को दर्शाता है। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि हर्षा शुरू से ही मेधावी रही हैं, लेकिन यह परिणाम उनकी उम्मीदों से भी कहीं ज्यादा सुखद है।

बिना कोचिंग और ट्यूशन के गाड़े सफलता के झंडे

आज के दौर में जहां माता-पिता को लगता है कि बिना महंगे कोचिंग संस्थानों और भारी-भरकम ट्यूशन के बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक नहीं लाए जा सकते, हर्षा ने उस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया है। हर्षा की इस कामयाबी की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए किसी भी तरह की प्राइवेट ट्यूशन का सहारा नहीं लिया।

अपनी सफलता का राज साझा करते हुए हर्षा ने बताया कि उन्होंने पूरी तरह से ‘सेल्फ स्टडी’ यानी स्व-अध्ययन पर भरोसा किया। वह नियमित रूप से घंटों पढ़ाई करती थीं और जो भी विषय कठिन लगता, उसे बार-बार लिखकर अभ्यास करती थीं। हर्षा कहती हैं, “मुझे खुद भी यकीन नहीं था कि मेरे पूरे 500 अंक आ जाएंगे। यह मेरे शिक्षकों के सरल मार्गदर्शन और परिवार के अटूट सहयोग का ही नतीजा है।” उनकी यह उपलब्धि उन छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो मानते हैं कि सफलता का रास्ता सिर्फ कोचिंग की गलियों से होकर गुजरता है।

स्कूल और परिवार में खुशी की लहर, चेयरमैन ने दी बधाई

जैसे ही परिणाम घोषित हुए, दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। स्कूल के चेयरमैन सुरजीत सिंह ने हर्षा की इस अभूतपूर्व सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे स्कूल के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा, “हर्षा की यह कामयाबी इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो कोई भी बाधा आपके रास्ते का पत्थर नहीं बन सकती।”

असल में, स्कूल प्रशासन का मानना है कि हर्षा ने विपरीत परिस्थितियों और पढ़ाई के दबाव के बावजूद अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा और पूरा ध्यान केवल अपनी पढ़ाई पर केंद्रित रखा। स्कूल में मिठाई बांटी गई और हर्षा के सहपाठियों ने भी अपनी दोस्त की इस उपलब्धि पर खूब जश्न मनाया।

माता-पिता के समर्थन ने दी आगे बढ़ने की ताकत

किसी भी बच्चे की सफलता के पीछे उसके परिवार का बड़ा हाथ होता है। हर्षा की मां अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर फूली नहीं समा रही हैं। उन्होंने बताया कि हर्षा ने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा। वह अनुशासन के साथ अपनी पढ़ाई पूरी करती थी और परीक्षा के दिनों में भी उसने कभी तनाव नहीं लिया। हर्षा की मां के अनुसार, “बेटी शुरू से ही अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर रही है। उसने अपनी लगन से आज यह साबित कर दिया कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।”

हर्षा अब उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए एक रोल मॉडल बन गई हैं जो आने वाले वर्षों में बोर्ड की परीक्षा देने वाले हैं। उनकी कहानी बताती है कि संसाधनों की कमी या कोचिंग का न होना आपकी सफलता में आड़े नहीं आता, अगर आपके पास खुद पर भरोसा और कड़ी मेहनत करने का जज्बा हो। रुद्रपुर की इस बेटी ने आज उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था और यहां की प्रतिभा का लोहा पूरे देश में मनवा दिया है।

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