जंग अभी बाकी है…संसद के बाद सड़क पर होगी 'नारी शक्ति' के हक की लड़ाई
TV9 Bharatvarsh April 18, 2026 03:43 AM

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर पेश हुए संविधान संशोधन बिल को सरकार पास नहीं करा पाई है, क्योंकि जरूरी दो तिहाई बहुमत नहीं था. हालांकि, इस बिल पर दो दिन से जारी बवाल के जरिए देश में एक सियासी संदेश दिया गया. सरकार की तरफ से भी और विपक्ष की तरफ से भी. विधानसभा चुनाव के बीच दोनों तरफ से नैरेटिव बनाने की कोशिश चल रही है. मकसद ये साबित करना है कि कौन महिलाओं का हितैषी है और कौन नहीं. अब शनिवार को बीजेपी इस मुद्दे को लेकर देशभर में प्रदर्शन करेगी.

दो दिन की चर्चा के बाद सरकार ने संविधान संशोधन से जुड़े महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किए. इसके समर्थन में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230. कुल 528 सांसदों ने वोट डाले. दो तिहाई के हिसाब से बिल पास कराने के लिए 352 वोट जरूरी थे. यानी सरकार 54 वोट से चूक गई और बिल पास नहीं हो पाया. मतलब नंबर गेम में सरकार कामयाब नहीं रही.

नंबर में पिछड़ने के संकेत बीते दिन से ही दिए जा रहे थे. प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण में इशारा दिया था. गृह मंत्री अमित शाह के भाषण में भी ये मैसेजिंग थी. वहीं, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही साफ कर दिया था वो किसी कीमत पर ये बिल पास नहीं होने देंगे. चाहे सरकार हो या विपक्ष… लोकसभा में इस बिल पर दोनों तरफ से जबर्दस्त लड़ाई चली. बहस हुई और दोनों तरफ से एकजुटता का भी मैसेज दिया गया.

महिला आरक्षण पर सियासत तेज

यानी व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बावजूद संविधान संशोधन बिल पर सरकार भी एकजुट और दूसरी तरफ विपक्ष भी. बिल पर वोटिंग के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी. वोटिंग के बाद स्पीकर ने बिल पारित नहीं होने की घोषणा की जिसके बाद किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखे तीर चलाए. बिल गिरने के बाद NDA की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रोटेस्ट किया.

संसद के मकर द्वार से ये प्रोटेस्ट शुरू हुआ. अब बीजेपी और NDA में शामिल दलों के कार्यकर्ता 18 अप्रैल से इंडिया ब्लॉक से जुड़ी पार्टियों के नेताओं के घर के बाहर प्रोटेस्ट करेंगे लेकिन शुक्रवार को भी लोकसभा में बहस जोरदार हुई. गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के एक-एक आरोप का जवाब दिया. उनकी शंकाओं का समाधान करने की कोशिश की. कांग्रेस को परिसीमन से लेकर महिला और ओबीसी आरक्षण तक का सबसे विरोधी बताया.

संसद में सरकार और विपक्ष में तकरार

अमित शाह ने कहा कि 1972 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सीटों को बढ़ाने के बाद इसे फ्रीज कर दिया. इंदिरा गांधी ने 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल में 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी. जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं वो कहीं न कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, इंडी गठबंधन के सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु का उपयोग करके महिला आरक्षण का विरोध किया. विपक्ष ने जाति जनगणना टालने का भ्रम फैलाया जबकि हम पूरा टाइमटेबल घोषित कर चुके हैं. उत्तर बनाम दक्षिण के नैरेटिव पर उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण के राज्यों का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का.

महिला सशक्तिकरण बनाम चुनावी राजनीति

शाह ने कहा कि नेहरू…इंदिरा और राजीव गांधी तीनों ओबीसी के सबसे बड़े विरोधी थे. मोदी सरकार में 40 प्रतिशत ओबीसी मंत्री हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि बिल का विरोध करने वाले चुनाव में महिलाओं के बीच जाएंगे तो उन्हें भागने का रास्ता नहीं मिलेगा…चुनाव मैदान में मातृ शक्ति जवाब मांगेगी.

उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया. महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है.

चुनाव से पहले नैरेटिव की लड़ाई

वैसे वोटिंग से पहले बीच में एक ऐसा मौका भी आया, जब लगा कि शायद कहीं बात बन जाए. ऑफर अमित शाह की तरफ से भी आया और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की तरफ से भी. वेणुगोपाल का एक ऑफर तो सरकार मान गई लेकिन दूसरे ऑफर पर इनकार कर गई. वहीं, अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी की महिला सीएम के नाम भी गिनाए.

उन्होंने ये साबित करने की कोशिश की कि कांग्रेस महिलाओं का सम्मान नहीं करती जबकि बीजेपी सिर्फ बात नहीं करती बल्कि महिलाओं को बड़े पद भी देती है. इससे पहले लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बिल पर अपनी बात रखी. राहुल जब बोल रहे थे तो बीच बीच में काफी हंगामा हो रहा था. उनके भाषण में कहे गए शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कई बार आपत्ति की.

राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बीजेपी जानती है वो इस बिल को पास नहीं करा सकती. देश की राजनीति में जो हो रहा है उससे बीजेपी डर रही है? आपकी पावर कम होती जा रही है. ऐसे में सरकार जो बिल लेकर आ रही है उसका महिला सशक्तिकरण से लेना देना नहीं है. बीजेपी इस महिला आरक्षण बिल के जरिए देश का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है. जैसा कि असम में किया, लेकिन हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे.

बिल गिरा, लेकिन मुद्दा जिंदा

राहुल गांधी ने कहा कि हम ओबीसी का हक छीनने नहीं देंगे. आप उन्हें हिंदू बताते हो लेकिन उन्हें देश में उनका हक नहीं दिलाते. राहुल गांधी ने अपने भाषण में ये साफ किया कि विपक्ष इस बिल को पास नहीं होने देगा. वोटिंग से पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जब बोल रहे थे तो बीच बीच में काफी हंगामा हो रहा था. उनके भाषण में कहे गए शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कई बार आपत्ति की.

खासतौर से जब एक जादूगर की कहानी के जरिए उन्होंने सरकार को घेरने की कोशिश की तो इस पर सत्ता पक्ष भड़क गया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उनके शब्दों पर कड़ा ऐतराज जताया. उनके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नेता प्रतिपक्ष से कहा कि वो पीएम के लिए कहे गए अपने शब्दों पर माफी मांगें. रिजिजू ने कहा ऑपरेशन सिंदूर , बालाकोट का मजाक बना रहे हैं. ऐसे ऑपरेशन को जादू कह रहे हैं.

ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष

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