बंगाल की वो सीट जहां बोलती है बीजेपी की तूती, ममता भी सामने से नहीं लड़तीं
TV9 Bharatvarsh April 18, 2026 03:43 PM

हिमालय की तलहटी में बसा दार्जिलिंग वैसे तो अपनी खूबसूरती की वजह से जाना जाता है लेकिन राजनीति की दुनिया में इस सीट की अपनी अलग पहचान है. मौजूदा समय 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का है तो ऐसे में इस जिले की चुनावी पैठ के बारे में भी समझते हैं. दार्जिलिंग जिले में 3 पहाड़ी (दार्जिलिंग, कर्सियांग और कलिम्पोंग) और 3 मैदानी (सिलीगुड़ी, फांसिदेवा और माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी) सीट हैं. आमतौर पर पश्चिम बंगाल में सीएम ममता दबदबा माना जाता रहा है क्योंकि उन्होंने 2011 से तीन बार तक सीएम की कुर्सी पर अपनी जगह बनाई है, लेकिन दार्जिलिंग ऐसा क्षेत्र है जहां बीजेपी की तूती बोलती है और ममता बनर्जी भी सामने से चुनाव नहीं लड़ती हैं. इस बार दार्जिलिंग में 23 अप्रैल को चुनाव होने हैं.

बीजेपी का दबदबा

बात करें विधानसभा चुनाव के स्थिति की तो 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के समर्थन से लड़ने वाले उम्मदवारों को यहां जीत मिली थी. बीजेपी का समर्थन गोरखा पार्टियों को है ऐसे में गोरखा पार्टियों ने 3 पहाड़ी और 3 मैदानी सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी का दबदबा इन सीटों पर न सिर्फ विधानसभा चुनाव बल्कि संसदीय चुनाव में साफ नजर आता है. 2014 से, BJP उम्मीदवारों ने संसदीय चुनावों में लगातार दार्जिलिंग सीट जीती है.

गोरखा पार्टियों का ममता पर भरोसा नहीं

गोरखा पार्टियों का लंबे समय से बीजेपी पर भरोसा है. उनका मौजूदा सरकार के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है. गोरखा समुदाय से आने वाले लोग एक अलग गोरखा राज्य की मांग करते हैं. और अपनी मांग को लेकर वो समर्थन पाने की उम्मीद में केंद्र सरकार की सत्ताधारी पार्टी पर निर्भर है. यहां पर गोरखा पार्टियां (GJM, GNLF) हैं. वहीं ममता दार्जिलिंग के पहाड़ों क्षेत्र में उतरी पार्टियों में अनित थापा की BGPM को सपोर्ट कर रही हैं. इस बार के चुनाव में गोरखा समुदाय के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. BGPM को ममता, GJM को बीजेपी और एक नई पार्टी IGJF के उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.

आरएसएस की भूमिका अहम

पिछले कुछ सालों में पहाड़ों में सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत के तौर पर BJP ही उभरी है. पहाड़ों और आस-पास के इलाकों में अलग-अलग समूहों और उप-समूहों के बीच अपना नेटवर्क सफलतापूर्वक बनाने और उसका विस्तार करने में RSS की कड़ी मेहनत के भरोसे, पार्टी ने TMC और दूसरे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत कर ली है.

गृह मंत्री अमित शाह का गोरखा लैंड मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान का वादा शायद एक ऐसा राजनीतिक लालच हो, जिसे BJP की स्थिति मजबूत करने के लिए गोरखा पार्टियों के सामने रखा जा रहा है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.