कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला आरक्षण बिल को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी। यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। ALSO READ: क्या प्रियंका गांधी की 'सॉफ्ट पावर' राहुल की 'तल्ख राजनीति' पर पड़ रही है भारी? अमित शाह भी हुए मुरीद
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है।
वायनाड से कांग्रेस सांसद ने कहा कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में है। 2023 में पास बिल को लागू करें सरकार। यह महिला आरक्षण की नहीं परिसीमन की बात थी। परिसीमन पर विपक्ष का साथ देना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हक दीजिए, अभी दीजिए। उन्होंने कहा कि कल संसद में विपक्ष की बड़ी जीत हुई।
भाजपा का महिलाओं के संदर्भ में एक इतिहासप्रियंका ने कहा कि भाजपा का महिलाओं के संदर्भ में एक इतिहास है। ये इतिहास बहुत स्पष्ट है। सिर्फ सदन में विपरीत कहने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। देश की महिलाओं ने उन्नाव को देखा, हाथरस को देखा, महिला खिलाड़ियों को देखा, मणिपुर की महिलाओं को देखा। मोदी सरकार ने कभी उनकी सुध नहीं ली और आज संसद में 'महिलाओं का मसीहा' बनना चाहती है।
सरकार ने रची साजिशउन्होंने कहा कि गृह मंत्री जी और प्रधानमंत्री जी ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा। इन बातों से ही साफ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी। मेरा मानना है कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। इसके लिए सरकार ने महिलाओं का इस्तेमाल किया।
क्या था सरकार का प्लान? कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह बिल पारित करवा दे। ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए, जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े। मोदी सरकार का मानना था कि अगर बिल पारित होगा तो उनकी जीत होगी और बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे। भाजपा ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी।
edited by : Nrapendra Gupta