मुंबई । ठाणे स्थित वन विभाग ने संजय गांधी नेशनल पार्क एरिया समेत ठाणे वन क्षेत्र में वाइल्डलाइफ के शिकार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में हुई कुछ शिकार की घटनाओं को देखते हुए, विभाग ने ‘एंटी स्नेयर कॉम्बिंग ऑपरेशन’ चलाकर जंगल में संदिग्ध हरकतों पर कड़ी नज़र रखना शुरू कर दिया है।
इस अभियान के दौरान, जंगल के सबसे दूर-दराज के इलाकों में स्पेशल टीमों ने पूरी जांच की। जंगली जानवरों को फंसाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पासे, जाल या दूसरे गैर-कानूनी डिवाइस मिले और उन्हें हटा दिया गया। इसके साथ ही, सेंसिटिव जगहों को रिकॉर्ड करके भविष्य के खतरों को रोकने के लिए एक स्ट्रेटेजी नीति बनाई गई है।
यह मुहिम चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (वाइल्डलाइफ) वेस्ट। , मुंबई जितेंद्र रामगांवकर के मार्ग दर्शन में शुरू हुआ। वाइल्डलाइफ वेलफेयर एसोसिएशन (WWA) और रेस्क्यू एसोसिएशन फॉर वाइल्डलाइफ वेलफेयर (RAWW) के वॉलंटियर्स ने लोकल फॉरेस्ट अधिकारियों के साथ मिलकर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के इस ऑपरेशन में एक्टिवली हिस्सा लिया। उनके सहयोग से जंगल में छोटी-छोटी हरकतों को पहचानना और समय पर एक्शन लेना और भी असरदार हो गया है।
बताया जाता है कि इस कैंपेन का मुख्य मकसद वाइल्डलाइफ के पोचिंग को रोकना, उनके हैबिटैट को बचाना और बायोडायवर्सिटी का बैलेंस बनाए रखना है। खास बात यह है कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने ऐसे ट्रैप सर्च कैंपेन रेगुलर चलाने का फैसला किया है, जिससे पोचिंग में शामिल असामाजिक तत्वों पर असरदार तरीके से रोक लगने की उम्मीद है। यह कैंपेन डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (ठाणे), असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (प्राइवेट वाइल्डलाइफ, ठाणे), फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर ठाणे और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर येउर की लीडरशिप में सफलतापूर्वक चलाया गया।