अब जाम टकराना होगा मुश्किल! किसने तोड़ी बीयर सेक्टर की कमर, इस दिग्गज ने बताई सच्चाई
TV9 Bharatvarsh April 19, 2026 06:43 PM

यूनाइटेड ब्रूअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक गुप्ता ने कहा है कि युद्ध के कारण कच्चे माल की बढ़ती कॉस्ट, सप्लाई की कमी और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए मूल्य निर्धारण प्रतिबंधों के बीच भारतीय बीयर उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है. गुप्ता ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि पर्याप्त रेगुलेटरी सपोर्ट नहीं मिलने से उद्योग की ग्रोथ और इनोवेशन पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि वॉर के कारण कच्चे माल, बोतल और अन्य कच्चे माल की कॉस्ट बढ़ गई है, जबकि कंपनियां बिना सरकारी अनुमति के कीमत नहीं बढ़ा सकती हैं. गुप्ता ने बताया कि बीयर उद्योग पर इसका असर अन्य उद्योगों की तुलना में अधिक पड़ा है. रुपये की कमजोरी, निर्यात में गिरावट और आपूर्ति की कमी से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है.

नोटिफिकेशन के बाद भी नहीं सुलझी समस्या

उन्होंने कहा कि बीयर की कीमतें मुख्य रूप से राज्यों की आबकारी पॉलिसी के तहत कंट्रोल होती हैं और लगभग 75 प्रतिशत कारोबार सरकारी नियमों के अधीन है. गुप्ता ने सरकार से अनुरोध किया कि कंपनियों को कंज्यूमर्य पर बोझ डाले बिना सरकार को अपने बिक्री मूल्य में लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की अनुमति दी जाए. उन्होंने समझाया कि कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में चला जाता है. उन्होंने बताया कि तेलंगाना जैसे कुछ राज्यों में, यूनाइटेड ब्रुअरीज को बीयर के प्रति केस लगभग 330 रुपये मिलते हैं, जबकि सरकारी टैक्स लगभग 1,400 रुपये होते हैं.

एल्युमीनियम की कॉस्ट में इजाफा

कैन की कमी के बारे में गुप्ता ने कहा कि सरकारी अधिसूचना के बावजूद अभी यह समस्या सुलझी नहीं है. यह आगे भी बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि एल्युमीनियम की कीमतें बढ़ रही हैं. गैस की कमी की वजह से विनिर्माताओं ने अपरिहार्य स्थिति घोषित कर दी है. स्थानीय कैन विनिर्माता भी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं. कैन का आयात करना महंगा बैठ रहा है. UBL, हेनेकेन के साथ मिलकर, कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. उन्होंने कहा कि ताकि लोग अपने प्लांट लगा सकें और हम उनके साथ टाई-अप कर रहे हैं, लेकिन इसमें कुछ साल लगेंगे.

इस साल की शुरुआत में, सरकार ने आयातित कैन पर BIS सर्टिफिकेशन की समय सीमा बढ़ा दी थी. उम्मीद थी कि इस कदम से गर्मियों के मौसम के चरम पर पहुंचने से पहले, मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने में मदद मिलेगी. उम्मीद थी कि इस कदम से कोला बनाने वाली कंपनियों से लेकर बीयर बनाने वाली कंपनियों तक को आपूर्ति में आ रही दिक्कतों से राहत मिलेगी. इन कंपनियों ने कैन की भारी कमी को लेकर चिंता जताई थी.

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