रिटायरमेंट फंड पर सरकार का बड़ा दांव! पेंशन सेक्टर में बढ़ेगा FDI, मानसून सत्र में बदलेगा कानून
TV9 Bharatvarsh April 19, 2026 07:43 PM

सरकार पेंशन सेक्टर में FDI की सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक कर सकती है, और इस संबंध में अगला संसद सत्र में एक बिल आने की उम्मीद है. यह कदम बीमा सेक्टर के अनुरूप होगा, जहां 100 प्रतिशत तक FDI की अनुमति है. पिछले साल, संसद ने बीमा सेक्टर में FDI की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने वाले एक बिल को मंजूरी दी थी. बीमा अधिनियम, 1938 में इससे पहले 2015 में संशोधन किया गया था, जिसके बाद FDI की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई थी.

NPS ट्रस्ट को PFRDA से अलग करने का प्रावधान

सूत्रों ने बताया कि पेंशन सेक्टर में FDI की सीमा बढ़ाने के उद्देश्य से पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013 में संशोधन का बिल विभिन्न मंजूरियों के आधार पर मानसून सत्र या शीतकालीन सत्र में आ सकता है. वर्तमान में, पेंशन फंड में FDI की सीमा 49 प्रतिशत निर्धारित है. इसके अलावा, सूत्रों ने बताया कि संशोधन बिल में NPS ट्रस्ट को PFRDA से अलग करने का प्रावधान भी हो सकता है.

उन्होंने कहा कि NPS ट्रस्ट के अधिकार, कार्य और कर्तव्य-जो वर्तमान में PFRDA (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली ट्रस्ट) विनियम, 2015 के तहत निर्धारित हैं-अब किसी चैरिटेबल ट्रस्ट या कंपनी अधिनियम के दायरे में आ सकते हैं. इसके पीछे का उद्देश्य NPS ट्रस्ट को पेंशन रेगुलेटर से अलग रखना और 15 सदस्यों वाले एक सक्षम बोर्ड द्वारा इसका प्रबंधन सुनिश्चित करना है. इन सदस्यों में से अधिकांश के सरकार से होने की संभावना है, क्योंकि राज्यों सहित सरकार ही इस कोष (corpus) में सबसे बड़ा योगदान देती है.

कब शुरू हुआ था एनपीएस

PFRDA की स्थापना पेंशन सेक्टर के व्यवस्थित विकास को बढ़ावा देने और सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, जिसे पेंशन फंड, केंद्रीय रिकॉर्ड-कीपिंग एजेंसी और अन्य मध्यस्थों पर पर्याप्त अधिकार प्राप्त हैं. यह सदस्यों के हितों की रक्षा भी करता है. भारत सरकार द्वारा ‘परिभाषित लाभ पेंशन प्रणाली’ (defined benefit pension system) को बदलने के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) की शुरुआत की गई थी. 1 जनवरी, 2004 से केंद्र सरकार की सेवाओं में शामिल होने वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए NPS को अनिवार्य कर दिया गया था (शुरुआती चरण में सशस्त्र बलों को इससे छूट दी गई थी), और 1 मई, 2009 से इसे सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक आधार पर भी लागू कर दिया गया है. सरकार ने बढ़ते और असहनीय पेंशन बिल के कारण, ‘डिफाइंड बेनिफिट, पे-एज़-यू-गो’ पेंशन योजना से हटकर ‘डिफाइंड कंट्रीब्यूशन’ पेंशन योजना (NPS) को अपनाने का एक सोच-समझकर लिया गया कदम उठाया था. इस बदलाव का उद्देश्य सरकार के सीमित संसाधनों को अधिक उत्पादक और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए मुक्त करना था.

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