विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में व्याप्त संकट का दुनियाभर में खाद्य सुरक्षा की स्थिति पर गहरा असर हो रहा है, कृषि उत्पादन, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियां उपजी हैं और आयात पर निर्भर देश इससे सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं। इस बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाज़ों पर हुए हमलों और ईरान के एक मालवाहक जहाज़ को अमेरिकी नौसेना द्वारा रोके जाने की ख़बरों से तनाव बढ़ा है।
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कृषि उत्पादन के लिए ज़रूरी उर्वरक व अन्य सामग्री की आपूर्ति के लिए भी यह जलमार्ग अहम है। 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका व इसराइल की हवाई बमबारी और फिर ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते से गुज़रने वाले जहाज़ों की आवाजाही थम गई है। इन हालात का उन देशों पर ज़्यादा असर हुआ है जो कि ईंधन व खाद्य वस्तुओं के आयात पर निर्भर हैं।
लाओ लोकतांत्रिक जन गणराज्य में ईंधन की क़ीमतें कुछ इलाक़ों में दोगुने स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे परिवहन की लागत बढ़ी है। स्थानीय परिवार या तो एक समय का भोजन छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं या फिर सस्ता, कम पोषक आहार पर निर्भर हैं।
वहीं नाइजीरिया में फ़रवरी के बाद से अब तक ईंधन की क़ीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, परिवहन की लागत लभगत दोगुनी हो गई है। देश में पहले से ही बड़ी संख्या में लोगों के लिए बुनियादी सामान की व्यवस्था कर पाना एक संघर्ष था और अब स्थिति बदतर होती जा रही है।
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मिस्र में भी क़ीमतों में तेज़ उछाल आया है और सब्ज़ियों के दाम लगभग तीन गुना हो गए हैं, खाने-पीने की मुख्य वस्तुओं के दाम में 18 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है और परिवहन क़ीमतें भी बढ़ी हैं। कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित लघु द्वीपीय विकासशील देश अतिरिक्त दबाव का सामना कर रहे हैं, माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। वहीं ईंधन की क़ीमतें बढ़ने से खाद्य सामग्री के दाम भी बढ़ रहे हैं, जिससे पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
खाद्य प्रणालियों पर दबावखाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व संकट की आंच पहले से ही नाज़ुक स्थिति में पहुंच चुकी कृषि-खाद्य प्रणालियों और वैश्विक आपूर्ति चेन पर हुआ है। खाद्य उत्पादन, व्यापार और वितरण में आए व्यवस्था से भोजन की उपलब्धता, सुलभता और उसे वहन करने की क्षमता पर ख़तरा है, विशेष रूप से आयात पर निर्भर देशों में।
यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि ऊर्ज़ा क़ीमतों की क़ीमतें बढ़ने और उर्वरक बाज़ार में आए व्यवधान से खाद्य उत्पादन की लागत बढ़ी है और कृषि उत्पादकता पर भी असर हुआ है।
तेल बाज़ारों में भी उठापटकसंयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान जा रहे एक मालवाहक जहाज़ को अपने नियंत्रण में लेने की ख़बरों के बाद वैश्विक बाज़ारों में तेल की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता पर अनिश्चितता व्याप्त है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में उपजा संकट, वैश्विक ईंधन की क़ीमतों पर दबाव डाल रहा है।
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इस संकरे जल मार्ग से होकर गुज़रने वाले तेल से भरे टैंकरों की रफ़्तार लगभग पूरी तरह थम गई है। एशियाई बाज़ारों में सोमवार को ब्रैंट कच्चे तेल की क़ीमते लगभग 6 प्रतिशत तक बढ़ीं, जिससे पिछले सप्ताह दर्ज की गई बेहतरी अब ढलान पर है, जब ईरान ने युद्धविराम के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने का संकेत दिया था।
मध्य पूर्व में हिंसक टकराव शुरू होने के बाद से ही, ऊर्जा बाज़ारों में उथलपुथल मची हुई है। संकट से पहले तेल की क़ीमत प्रति बैरल, 70 डॉलर थी, जो कि मार्च में 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गई थी।