भोपाल। लेंसकार्ट के कर्मचारियों को ड्रेस कोड का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लेंसकार्ट के एक स्टोर के बाहर हिंदू संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। रोशनपुरा स्थित लेंसकार्ट के शोरूम के बाहर श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर तिलक कलावे बिंदी और सिंदूर के प्रतिबन्ध का विरोध जताया। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा यह देश सनातनियों का है तालिबान या पाकिस्तान नहीं है। जहां पर कर्मचारियों को तिलक लगाने के अलावा बढ़ने एवं माता बहनों को सिंदूर और बिंदी लगाने पर प्रतिबंधित करेंगे।
चंद्रशेखर तिवारी ने सनातन धर्मियों से लेंस कार्ड के बहिष्कार की मांग की एवं कॉरपोरेट कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी कॉरपोरेट कंपनी इस बात का ध्यान रखें कि सनातन धर्म को कोई भी आघात पहुंचाने का प्रयास करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा अगर लेंस कार्ड जैसी कंपनियों में जिहादी मानसिकता के लोग काम कर रहे हैं तो उनका निष्कासन करिए अन्यथा हमने आपको शिखर तक पहुंचाया है तो हम फर्श पर लाकर धूल भी चटाने का काम सनातन धर्मी कर सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और स्टोर के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगें रखीं। उनका कहना था कि कंपनी को अपने विज्ञापन और ब्रांडिंग में ऐसे किसी भी तत्व से बचना चाहिए जो किसी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाए। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
वहीं ड्रेस कोड को लेकर विवाद में घिरी कंपनी लेंसकार्ट ने अब नई स्टाइल गाइड जारी कर माफी मांगी है। कंपनी ने साफ किया है कि कर्मचारी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ काम कर सकते हैं। लेंसकार्ट ने बयान जारी कर कहा कि उसने ग्राहकों और लोगों की चिंताओं को ध्यान से सुना है। कंपनी ने माना कि अगर पहले की किसी जानकारी से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे खेद है।
साथ ही यह भी कहा गया कि कंपनी भारत में बनी है और यहां के लोगों के लिए काम करती है, इसलिए कर्मचारियों को अपनी पहचान छोड़ने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।नई गाइडलाइन में साफ तौर पर कहा गया है कि कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहन सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि आगे की नीतियां और ट्रेनिंग इसी सोच को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी।