मायावती ने महिला आरक्षण पर स्पष्ट किया पार्टी का रुख, कार्यकर्ताओं को दी दिशा-निर्देश
newzfatafat April 22, 2026 05:42 PM

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपने विचार स्पष्ट करते हुए कार्यकर्ताओं को भ्रमित न होने की सलाह दी है। पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि 15 अप्रैल 2026 को लिया गया निर्णय अब भी लागू है। इसके साथ ही, संगठन को मजबूत करने और आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटने के निर्देश दिए गए हैं।


मायावती ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि वह पार्टी के कार्यों के सिलसिले में दिल्ली जा रही हैं और जल्द ही लौटेंगी। उन्होंने कहा कि पिछले महीने 31 मार्च को लखनऊ में हुई बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है, जिसमें पार्टी का जनाधार बढ़ाने और आर्थिक मजबूती पर जोर दिया गया था।




बैठकों में यह भी बताया जाना चाहिए कि यूपी में अब तक बने एक्सप्रेस-वे और नोएडा में एयरपोर्ट जैसे जनहित के कार्यों की योजना बीएसपी की सरकार में बनाई गई थी। मायावती ने कहा कि यदि केंद्र की कांग्रेस सरकार ने जातिवादी मानसिकता के चलते रुकावटें नहीं डाली होती, तो ये कार्य और भी तेजी से पूरे होते।


उन्होंने कहा कि यूपी के विकास और समाज के सभी वर्गों की उन्नति के लिए बीएसपी का शासन ही सही दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके लिए 'कानून द्वारा कानून का राज' की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ में 22 फरवरी को हुई बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।


मायावती ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड 15 अप्रैल वाला ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस मुद्दे पर गुमराह न हों और अनुशासन के अनुसार कोई धरना-प्रदर्शन न करें।


उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सामाजिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यदि महिला आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा नहीं दिया गया, तो वंचित वर्ग की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।


मायावती ने यह स्पष्ट किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण तभी संभव है जब सभी वर्गों की महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि महिलाओं की जनसंख्या के अनुपात को देखते हुए उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और कमजोर वर्गों की महिलाओं के हितों की सुरक्षा भी आवश्यक है।


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