हरियाणा कैबिनेट ने 27 अप्रैल को एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र को दी मंजूरी
Samachar Nama Hindi April 22, 2026 07:42 PM

चंडीगढ़, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा कैबिनेट ने बुधवार को 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। इस सत्र में हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज (भर्ती और सेवा शर्तें) विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा।

गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक में ग्रुप डी कर्मचारियों से जुड़े कॉमन कैडर के तहत पदोन्नति के लिए जरूरी नियम बनाने पर भी सहमति बनी।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन ग्रुप डी कर्मचारियों ने पांच साल से अधिक सेवा पूरी कर ली है, वे अब क्लर्क पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हो गए हैं।

हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज विधेयक के जिस मसौदे को मंजूरी दी गई है, उसमें ग्रुप डी से क्लर्क पद पर पदोन्नति का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अनुग्रह आधार पर पांच प्रतिशत पद आरक्षित करने की शर्त को भी नए नियमों में शामिल किया गया है।

महिला आरक्षण बिल को लेकर, जिसे लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई घटनाओं ने देश के सामने विपक्षी दलों की वास्तविक सोच को उजागर कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों का रवैया महिलाओं के प्रति सकारात्मक नहीं है और वे केवल सत्ता प्राप्त करने की सोच से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ये दिन देश के इतिहास में काले दिनों के रूप में याद किए जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दलों ने महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखा है और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से जानबूझकर दूर रखा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं की भागीदारी कोई उपहार नहीं है, बल्कि यह उनका अधिकार है।

सीएम सैनी ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने परिसीमन को लेकर गलत जानकारी और भ्रम फैलाने की कोशिश की, यह कहते हुए कि इससे कुछ राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री ने तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महिलाएं अपने वोट की ताकत से उन राजनीतिक दलों को जवाब देंगी, जो उनके अधिकारों के खिलाफ खड़े हैं।

--आईएएनएस

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