बेसहारापरिवारों के लिए बनी यह योजना, मिलती है ₹30,000 की मदद
Himachali Khabar Hindi April 23, 2026 08:42 AM

बेसहारा परिवारों के लिए बड़ी खबर! राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (Rashtriya Parivarik Labh Yojana) के तहत सरकार ₹30,000 की एकमुश्त आर्थिक मदद देती है। यदि आपके परिवार के कमाने वाले मुखिया (18-60 वर्ष) का निधन हो गया है, तो तुरंत जानें पात्रता और आवेदन की सरल प्रक्रिया!

केंद्र सरकार के साथ-साथ देश की सभी राज्य सरकारें भी अपने नागरिकों के लिए कई योजनाएं चलाती हैं, खासकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसहारा परिवारों के लिए एक खास योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत, यूपी सरकार गरीब परिवारों को ₹30,000 की आर्थिक सहायता देती है। आगे जानिए कि यह कौन सी योजना है और इसका लाभ किन लोगों को मिल सकता है।

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना क्या है ?

उत्तर प्रदेश सरकार अपने गरीब नागरिकों की मदद के लिए कई योजनाएं चलाती है। ऐसी ही एक योजना है राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, जिसे साल 2016 में शुरू किया गया था। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। इस सरकारी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता पहुँचाना है।

बेसहारा परिवारों को मिलेगी ₹30,000 की आर्थिक सहायता

इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को आर्थिक सहारा देना है, जिनके घर के मुखिया का निधन हो जाता है। ऐसे पात्र परिवारों को सरकार की ओर से ₹30,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस लाभ को पाने के लिए सरकार ने कुछ नियम और पात्रता शर्तें तय की हैं, जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है।

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का फायदा लेने के लिए योग्यता

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का फायदा उठाने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरुरी है। यह लाभ तब मिलता है जब परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाए, और उनकी उम्र मृत्यु के समय 18 से 60 साल के बीच हो। ध्यान दें, परिवार की सालाना आय एक सीमा से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए: शहरी क्षेत्रों में ₹56,450 और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹46,080।

साथ ही मुखिया की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से होनी चाहिए, हालाँकि कुछ ख़ास मामलों में आत्महत्या या दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी लाभ मिल सकता है। यह योजना मुख्य रूप से बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों के लिए है, और मृतक को सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।

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