किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! खरीफ सीजन से पहले सरकार का बड़ा बयान- 'देश में खाद की कोई कमी नहीं
TV9 Bharatvarsh April 25, 2026 12:43 PM

मिडिल ईस्ट में टेंशन के बाद जहां फ्यूल और गैस की सप्लाई को लेकर संकट गहराता जा रहा है. वहीं दूसरी ओर खाद की सप्लाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है. ये टेंशन सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में छाई हुई है. खासकर उन देशों में जहां पर आज भी बड़ी आबादी खेती और किसानी पर डिपेंड है. लेकिन भारत ने इस टेंशन और खाद की सप्लाई की कमी को लेकर सिे से खारिज कर दिया है. सरकार का कहना है कि देश के किसानों को खाद की सप्लाई को लेकर किसी तरह की चिंता करने की कोई जरुरत है. भारत में खाद की सप्लाई पर्याप्त है और किसी तरह की कोई किल्लत नहीं है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से ज्यादा कहा गया है.

खाद की कमी को किया खारिज

सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत में खाद की सप्लाई स्थिर है और ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है; सरकार ने उर्वरक की कमी की खबरों को खारिज कर दिया. उर्वरक विभाग ने एक बयान में कहा कि रबी 2025-26 सीज़न के आंकड़ों से पता चलता है कि यूरिया, DAP, MOP, NPK और SSP जैसे मुख्य पोषक तत्वों की उपलब्धता, उनकी मांग से कहीं ज़्यादा थी. विभाग ने कहा कि यह ट्रेंड मौजूदा वित्त वर्ष में भी जारी है, और खरीफ सीज़न से पहले स्टॉक ज़रूरत से काफी ज़्यादा है.

स्टॉक है भरपूर

खरीफ 2026 के लिए, अनुमानित ज़रूरत का लगभग 46% हिस्सा पहले से ही शुरुआती स्टॉक के तौर पर उपलब्ध है, जो सामान्य स्तर से काफी ज़्यादा है. सरकार ने कहा कि वह जमाखोरी रोकने और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ तालमेल बिठा रही है. बयान में आगे कहा गया कि वैश्विक सोर्सिंग – जिसमें यूरिया के नए टेंडर और घरेलू उत्पादन के लिए गैस की स्थिर सप्लाई शामिल है – ने हमारी तैयारियों को और मजबूत किया है. वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, किसानों को यूरिया रियायती दरों पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे यह किसानों की पहुंच में बना हुआ है.

कितना खाद इंपोर्ट करता है भारत

भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात करता है. गत वित्त वर्ष में देश ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था. चालू वित्त वर्ष के पहले 23 दिन में उर्वरकों की उपलब्धता आवश्यकता से काफी अधिक रही है. यूरिया की उपलब्धता 69.33 लाख टन है जबकि आवश्यकता 18.17 लाख टन है. डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की उपलब्धता 22.78 लाख टन है जबकि आवश्यकता 5.90 लाख टन है. म्यूरिएट ऑफ पोटाश की उपलब्धता 8.32 लाख टन है और आवश्यकता 1.73 लाख टन है. एनपीके की उपलब्धता 52.75 लाख टन है जबकि आवश्यकता 7.46 लाख टन है, और एसएसपी की उपलब्धता 25.60 लाख टन है जो 3.30 लाख टन आवश्यक है.

कितना है भंडार

खरीफ फसलों की बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है. पिछले वर्ष की तुलना से भी भंडार की बेहतर स्थिति स्पष्ट होती है. अप्रैल 2026 के मध्य तक यूरिया का भंडार 67.37 लाख टन है जबकि पिछले वर्ष यह 68.01 लाख टन था जो उच्च स्तर को दर्शाता है. वहीं डीएपी का भंडार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 22.16 लाख टन हो गया है जो पिछले वर्ष 13.01 लाख टन था. एनपीके का भंडार 41.85 लाख टन से बढ़कर 57.44 लाख टन हो गया है जो प्रमुख पोषक तत्वों की श्रेणियों में भंडार में उल्लेखनीय मजबूती को दर्शाता है. खरीफ 2026 की तैयारी को और मजबूत करते हुए उर्वरकों की आवश्यकता 390.54 लाख टन आंकी गई है जिसमें से करीब 180 लाख टन (46 प्रतिशत) पहले से ही शुरुआती भंडार के रूप में उपलब्ध है जो सामान्यतः सत्र से पहले के करीब 33 प्रतिशत स्तर से काफी अधिक है.

कई समस्याओं का किया समाधान

आयात के संबंध में सरकार ने कहा कि आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं और विदेशों में भारतीय मिशन वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था में लगे हैं. बयान के अनुसार वैश्विक निविदा के माध्यम से लगभग 25 लाख टन यूरिया सुनिश्चित किया गया है जिससे अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद आगामी सत्र के लिए आपूर्ति मजबूत होगी. घरेलू यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों का भी समाधान किया गया है और उर्वरक संयंत्रों को लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. साथ ही आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त एलएनजी/आरएलएनजी की व्यवस्था की जा रही है.

उठाए हैं कई कदम

वैश्विक उर्वरक कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद (जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की कीमत 4,000 रुपये प्रति बोरी से अधिक हो गई है) सरकार किसानों को वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए 45 किलोग्राम प्रति बोरी पर 266.5 रुपये की अत्यधिक सब्सिडी दर पर यूरिया उपलब्ध करा रही है. बयान में कहा गया कि उर्वरक विभाग दोहराता है कि भारत का उर्वरक तंत्र मजबूत, पर्याप्त भंडारित और प्रभावी रूप से प्रबंधित है. सरकार देशभर में किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाती रहेगी. राज्यों को उर्वरकों की हेराफेरी, जमाखोरी, कालाबाजारी और दहशत फैलाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सलाह दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उर्वरक किसानों तक समय पर और समान रूप से पहुंचें.

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