क्या आप भी बिना जागृत किए पहनते हैं रत्न? जान लें शुद्धिकरण और सिद्ध करने की सही विधि
हर्षिका मिश्रा April 25, 2026 05:42 PM

Gemstones Astrology: ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को केवल आभूषण नहीं, बल्कि 'कॉस्मिक रिसीवर्स' (Cosmic Receivers) माना गया है. ये पृथ्वी की गहराई में पाए जाने वाले वे खनिज हैं, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा को सोखकर मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

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रत्न कैसे कार्य करते हैं?

प्रत्येक ग्रह का अपना एक विशिष्ट रंग और तरंगदैर्घ्य (Wavelength) होती है. उसी प्रकार, रत्नों के भी अपने रंग और गुण होते हैं. जब हम कोई रत्न धारण करते हैं, तो वह संबंधित ग्रह की किरणों को आकर्षित कर हमारे शरीर में प्रवाहित करता है. इससे व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं.

रत्न को जागृत (Energize) करना क्यों आवश्यक है?

खदान से निकलने के बाद एक रत्न कई चरणों (तराशना, पॉलिश करना, व्यापार) से गुजरता है. इस लंबी प्रक्रिया में वह कई नकारात्मक ऊर्जाओं के संपर्क में आ सकता है.

  • अशुद्धि निवारण: विभिन्न हाथों से गुजरने के कारण रत्न अपनी मूल ऊर्जा खो देता है.
  • संकल्प की शक्ति: जागृत करते समय लिया गया संकल्प रत्न को एक 'दिशा' देता है कि उसे पहनने वाले की किस विशेष समस्या का समाधान करना है.
  • सक्रियता: बिना मंत्रोच्चार और पूजा के पहना गया रत्न मात्र एक पत्थर के समान है, जो अपेक्षित लाभ नहीं दे पाता.
  • चेतावनी: रत्न हमेशा किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य के परामर्श के बाद ही पहनें. गलत रत्न का चयन लाभ के स्थान पर हानि पहुँचा सकता है.

रत्न सिद्ध करने की सटीक विधि 

रत्न की पूर्ण क्षमता का लाभ उठाने के लिए नीचे दी गई विधि का पालन करना चाहिए:

शुद्धिकरण (Purification):  रत्न को धारण करने से पहले उसे पंचामृत (कच्चा दूध, गंगाजल, शहद, दही और घी) के मिश्रण में कम से कम 2-3 घंटे के लिए डुबोकर रखें. यह प्रक्रिया रत्न की भौतिक और सूक्ष्म अशुद्धियों को दूर करती है.

पूजन और ध्यान: शुद्धिकरण के बाद रत्न को साफ जल से धो लें. धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर अपने इष्ट देव और संबंधित ग्रह का ध्यान करें.

मंत्र जाप (Prana Pratishtha): यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है. संबंधित ग्रह के विशिष्ट बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. इससे रत्न की ऊर्जा सीधे उस ग्रह के ब्रह्मांडीय प्रवाह से जुड़ जाती है.

शुभ मुहूर्त का चयन: प्रत्येक रत्न का अपना एक निर्धारित दिन और समय (चौघड़िया) होता है.

  • उदाहरण: पुखराज को गुरुवार, और माणिक्य को रविवार के शुभ मुहूर्त में पहनना चाहिए.

रत्न हमारे जीवन के संघर्षों को पूरी तरह खत्म करने का कोई जादू नहीं हैं, बल्कि ये हमें उन संघर्षों से लड़ने के लिए आंतरिक शक्ति और अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करते हैं. एक उच्च गुणवत्ता वाला रत्न और उसकी सही शुद्धिकरण विधि ही आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है.

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