कर्नाटक में CM को लेकर कलह बरकरार! शिवकुमार के पक्ष के आए प्रणवानंद स्वामीजी, बोले- नहीं बनाया तो होंगे गंभीर परिणाम
TV9 Bharatvarsh April 27, 2026 01:42 PM

कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को राज्य का सीएम बनाए जाने की मांग उनके समर्थक कई महीनों से कर रहे हैं. लेकिन पार्टी आलाकमान ने इस पर अभी तक चुप्पी साध रखी है. इस बीच राज्य के सबसे पिछड़े वर्ग के मठों के प्रमुखों के मंच के अध्यक्ष प्रणवानंद स्वामीजी ने भी कांग्रेस आलाकमान से यह अपील की है कि वे तुरंत शिवकुमार को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री नियुक्त करें.

प्रणवानंद स्वामीजी ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अगर शिवकुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो कांग्रेस को “परिणाम” भुगतने पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि 25 स्वामीजी का एक ग्रुप पार्टी आलाकमान के सामने यह मांग रखने के लिए नई दिल्ली जाने की भी योजना बना रहा है. इससे पहले दिन में, शिवकुमार ने कहा था कि राज्य में नेतृत्व के मसले पर पार्टी आलाकमान जो भी फैसला लेगा, वह और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दोनों उसका पालन करेंगे.

4 मई के बाद सरकार में फेरबदल के कयास

उनकी ओर से ये टिप्पणियां पार्टी और राजनीतिक गलियारों में इस अटकल के बीच आई हैं कि 4 मई के बाद नेतृत्व में संभावित बदलाव और कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है. 4 मई को 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजे, साथ ही कर्नाटक की 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे.

प्रणवानंद स्वामीजी ने शिवकुमार को सीएम बनाए जाने की वकालत करते हुए कहा, “राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी का मुद्दा अभी भी चल रहा है. राज्य में सबसे पिछड़े वर्ग के मठों के स्वामीजी की महासभा के अध्यक्ष के तौर पर, मैं यह मांग करता हूं कि शिवकुमार को तुरंत मुख्यमंत्री बनाया जाए. इस सरकार को सत्ता में आए करीब 3 साल हो चुके हैं, और इसके लिए कई समय सीमा भी तय की गई हैं, जैसे संक्रांति, उगादी और 5 राज्यों के चुनाव.”

DK के लिए यह स्थिति अपमानजनकः स्वामीजी

कलबुर्गी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिवकुमार के लिए “अपमानजनक” प्रतीत होती है. उन्होंने कहा, “शिवकुमार ने कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष (KPCC) अध्यक्ष का पद तब संभाला था जब कोई भी इस पद को स्वीकार करने को तैयार नहीं था, साथ ही उन्होंने पार्टी की सत्ता में वापसी भी कराई. उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी नेता राहुल गांधी और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की मौजूदगी में मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया गया था. पार्टी अब उस वादे को पूरा करने में हिचकिचा क्यों रही है? यह सही नहीं है.”

सिद्दारमैया की बात करते हुए स्वामीजी ने कहा कि वह इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि सिद्धारमैया पिछड़े समुदायों के एक “बड़े नेता” हैं, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह पहले ही करीब आठ साल तक मुख्यमंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, और इसमें उनका पहला कार्यकाल (5 साल) भी शामिल है. उन्होंने कहा, “हम यह नहीं कह सकते कि उनके कार्यकाल के दौरान पिछड़े वर्गों को कोई खास फायदा मिला है. यहां तक कि हाल के राज्य बजट में भी पिछड़े वर्ग के समुदायों के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया गया.”

शिवकुमार से बात के बाद दिल्ली जाएंगे 25 स्वामी

कांग्रेस आलाकमान से शिवकुमार को तुरंत मुख्यमंत्री बनाए जाने की अपील करते हुए, प्रणवानंद स्वामीजी ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पार्टी को राज्य में “गंभीर नतीजों” का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि स्वामीजियों की महासभा शिवकुमार से मुलाकात करने वाली है, और फिर बातचीत के बाद, करीब 25 स्वामी दिल्ली जाएंगे.

उन्होंने आगे कहा, “सबसे पिछड़े समुदायों के लिए शिवकुमार का योगदान बहुत बड़ा रहा है. वह 8 बार MLA और कई बार मंत्री रह चुके हैं. लेकिन अब उन्हें CM का पद क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने पार्टी के लिए काम किया है और वह पहचान के हकदार हैं- कांग्रेस नेतृत्व से मेरी यही मांग है.”

कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस के अंदर नेतृत्व की खींचतान एक बार फिर से तेज हो गई है. पिछले साल 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल का आधा सफर पूरा कर लिया, लेकिन इससे पहले से ही राज्य में मुख्यमंत्री को बदलने की मांग शुरू हो गई थी और तभी से ही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लगाई जा रही हैं.

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