Parshuram Dwadashi 2026: परशुराम द्वादशी आज, संतान सुख पाने के लिए ये दिन क्यों माना जाता है बेहद खास?
TV9 Bharatvarsh April 28, 2026 12:43 PM

Parshuram Dwadashi 2026 kab hai: पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को परशुराम द्वादशी के रूप में मनाया जाता है. यह दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम को समर्पित है. ऐसी मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं या अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है. परशुराम द्वादशी का पर्व जयंती के ठीक 9 दिन बाद आता है. साल 2026 में 19 अप्रैल को परशुराम जयंती का पर्व मनाया गया जो उनके जन्म का उत्सव है, जबकि द्वादशी एक विशिष्ट साधना और व्रत की तिथि है जो आध्यात्मिक लाभ और संतान सुख के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.

परशुराम द्वादशी 2026, तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल द्वादशी तिथि का आरंभ 27 अप्रैल 2026, सोमवार को शाम 06:15 बजे से हो रहा है, जबकि इसका समापन 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को शाम 06:51 बजे पर होगा. उदया तिथि के अनुसार मुख्य व्रत 28 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा. वहीं व्रत का पारण अगले दिन यानी 29 अप्रैल 2026 की सुबह 05:42 से 08:21 बजे के बीच करना शुभ रहेगा.

संतान सुख के लिए क्यों खास है परशुराम द्वादशी?

भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिन्होंने अधर्म और अन्याय के खिलाफ धरती पर जन्म लिया. मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, वे इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करें तो उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. पुराणों में वर्णन मिलता है कि परशुराम जी की कृपा से न केवल संतान प्राप्ति होती है, बल्कि योग्य, संस्कारी और दीर्घायु संतान का आशीर्वाद भी मिलता है. साथ ही यह व्रत पितृ दोष, ग्रह बाधा और पूर्व जन्म के कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला भी माना गया है.

ऐसे करें परशुराम द्वादशी का व्रत

इस पावन दिन स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें और घर के मंदिर को स्वच्छ कर दीपक जलाएं. इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पूजा के दौरान चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम या परशुराम स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और फलाहार करें. पूजा के आखिर में भगवान से संतान सुख और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें. शाम के समय फिर से दीपक जलाकर आरती करें और प्रसाद वितरण करें. अगले दिन समय पर व्रत का पारण करें.

परशुराम द्वादशी का धार्मिक महत्व

परशुराम द्वादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि धर्म और न्याय की स्थापना का प्रतीक है. इस दिन दान-पुण्य, विशेष रूप से अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से कई गुना फल प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन के कष्टों को दूर करते हैं और सौभाग्य में वृद्धि करते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह दिन आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का संदेश देता है. जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से पूजा करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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