अपनी ही कंपनियों के शेयर क्यों खरीद रहे हैं दिग्गज? अडानी से लेकर बिड़ला तक ने लगाए हजारों करोड़
TV9 Bharatvarsh April 29, 2026 05:44 PM

भारतीय शेयर बाजार में दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है. जहां पहले प्रमोटर ऊंचे वैल्यूएशन पर हिस्सेदारी बेच रहे थे, वहीं अब वही दिग्गज अपनी ही कंपनियों के शेयर बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं. अडानी से लेकर बिड़ला ग्रुप तक अपनी ही कंपनियों में पैसा डाल रहे हैं. आखिर इस ट्रेंड के पीछे क्या वजह है और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

दो साल तक लगातार भारी बिकवाली के बाद भारतीय कॉरपोरेट प्रमोटरों ने 2026 में रणनीति बदल दी है. 2024-25 के दौरान जहां प्रमोटरों ने करीब $56 बिलियन की इक्विटी बेचकर ऊंचे वैल्यूएशन का फायदा उठाया, वहीं अब बाजार में गिरावट के बाद उन्होंने यू-टर्न लेते हुए अपनी ही कंपनियों में $4 बिलियन करीब 38 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है.

दिग्गजों ने की खरीदारी

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खरीदारी में सबसे आगे Adani Group रहा है. समूह की प्रमुख कंपनी Adani Enterprises ने राइट्स इश्यू के जरिए करीब $2 बिलियन जुटाए, जिसमें प्रमोटरों ने अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में निवेश किया. इसी तरह GMR Group ने भी बड़ा दांव खेला. GMR एयरपोर्ट्स के घरेलू प्रमोटरों ने विदेशी निवेशकों से 7.3% हिस्सेदारी खरीदने के लिए लगभग $1 बिलियन का निवेश किया. यह खरीदारी अलग-अलग तरीकों डायरेक्ट बाय, ऑप्शन और FCCB बायबैक के जरिए की गई.

पावर सेक्टर में JSW एनर्जी के प्रमोटरों ने भी प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए $317 मिलियन का निवेश किया, जिससे उनकी हिस्सेदारी में इजाफा हुआ. वहीं आदित्य बिड़ला ग्रुप ने Grasim Industries के जरिए खुले बाजार से शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई.

क्यों बढ़ी खरीदारी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ी वजह वैल्यूएशन का सामान्य स्तर पर आना है. 2024-25 में भारतीय बाजार लगभग 22x P/E पर ट्रेड कर रहा था, जो ऐतिहासिक औसत से ऊपर था. ऐसे में प्रमोटरों ने हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमाया. अब, बाजार में गिरावट के चलते वैल्यूएशन घटकर करीब 20x के आसपास आ गया है, जो लंबी अवधि के औसत के करीब है. इससे प्रमोटरों को अपनी ही कंपनियों के शेयर सस्ते लगने लगे हैं.

किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा खरीदारी?

रिपोर्ट के अनुसार, यह खरीदारी मुख्य रूप से एसेट-हैवी सेक्टरों—जैसे पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट में केंद्रित रही है. गोदरेज प्रॉपर्टीज में प्रमोटरों ने सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बढ़ाई, जहां करीब 4.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, मारुति सुजुकी में भी प्रमोटरों ने निवेश किया, हालांकि कंपनी के बड़े मार्केट कैप के कारण हिस्सेदारी में मामूली बदलाव हुआ. इसके अलावा Indus Towers, Jindal Stainless और Macrotech Developers जैसी कंपनियों में भी हिस्सेदारी बढ़ाई गई.

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

प्रमोटरों की खरीदारी को आमतौर पर बाजार में सकारात्मक संकेत माना जाता है. जब कंपनी के मालिक खुद अपने शेयर खरीदते हैं, तो यह उनके बिजनेस की भविष्य की संभावनाओं में भरोसे को दर्शाता है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि यह ट्रेंड अभी व्यापक नहीं है, बल्कि चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है. इसका मतलब है कि प्रमोटर हर जगह निवेश नहीं कर रहे, बल्कि सोच-समझकर रणनीतिक निवेश कर रहे हैं.

पिछले दो सालों में BSE-500 कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर ऐतिहासिक निचले स्तर 48.4% तक पहुंच गई थी, लेकिन 2026 में इसमें हल्की रिकवरी देखने को मिल रही है. यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर बाजार की गिरावट को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देख रहा है. आने वाले समय में यदि बाजार स्थिर रहता है, तो प्रमोटरों की यह खरीदारी और तेज हो सकती है.

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