News India Live, Digital Desk: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आगामी 5 मई को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। पंजाब की सियासत और केंद्र-राज्य संबंधों के लिहाज से इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सूत्रों के अनुसार, सीएम मान ने राष्ट्रपति भवन से मिलने का समय मांगा था, जिसकी अनुमति मिल गई है। इस बैठक में पंजाब से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों और केंद्र सरकार के पास लंबित पड़े राज्य के हकों पर चर्चा होने की संभावना है।मुलाकात के मुख्य एजेंडे में क्या है?माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति के सामने पंजाब की ओर से निम्नलिखित प्रमुख मांगें और शिकायतें रख सकते हैं:RDF और अन्य फंडों का मुद्दा: पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र ने ग्रामीण विकास निधि (RDF) का करोड़ों रुपया रोक रखा है, जिससे राज्य के बुनियादी ढांचे पर असर पड़ रहा है।राज्य के संवैधानिक मामले: पंजाब में राज्यपाल और सरकार के बीच समय-समय पर होने वाले टकराव और विधायी कामकाज में आ रही बाधाओं को लेकर भी चर्चा हो सकती है।सीमा सुरक्षा और नशा: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब की सुरक्षा चुनौतियों और ड्रोन्स के जरिए हो रही तस्करी के मुद्दों पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है।कृषि और किसान: कृषि कानूनों के बाद उपजी परिस्थितियों और किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर पंजाब सरकार अपना पक्ष रखेगी।केंद्र और राज्य के बीच बढ़ती तल्खी के बीच बैठकयह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों पर खींचतान चल रही है। भगवंत मान पिछले काफी समय से केंद्र पर पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते रहे हैं। राष्ट्रपति, जो देश की संवैधानिक प्रमुख हैं, उनके पास गुहार लगाकर मान सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह पंजाब के हकों के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है।क्या निकलेगा इस बैठक का नतीजा?हालांकि यह एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट भी हो सकती है, लेकिन पंजाब की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे 'मिशन पंजाब' के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। 5 मई को होने वाली इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान दिल्ली में मीडिया से रूबरू होकर बैठक के विवरण साझा कर सकते हैं।विपक्ष की नजरेंराज्य के विपक्षी दल (अकाली दल और कांग्रेस) भी इस मुलाकात पर पैनी नजर रखे हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री को केवल फोटो खिंचवाने के बजाय राज्य के लिए ठोस समाधान लेकर आना चाहिए।