Ajab Gajab! चीन के झेजियांग से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि यहां के एक 40 वर्षीय व्यक्ति का दिल दो दिन तक यानी लगभग 40 घंटे नहीं धड़का, फिर भी वह जीवित रहा, और यह सब कुछ मुमकिन हुआ है आधुनिक मेडिकल तकनीक की वजह से, जिसकी बदौलत आज वह पूरी तरह स्वस्थ है.
झेजियांग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन से संबद्ध एक हॉस्पिटल के डॉ. लू जियो (DoctorLu Xiao) ने यह दावा किया है. उन्होंने बताया कि मरीज को दिल का दौरा पड़ा था. उसे बचाने के लिए इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए, लेकिन दिल ने रिएक्ट नहीं किया. जब उम्मीदें खत्म होने लगीं, तब एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) मशीन का सहारा लिया.
कृत्रिम हृदय ने बचाई जानECMO मशीन शरीर के बाहर एक कृत्रिम दिल और फेफड़े की तरह काम करती है. यह खून से कार्बन डाइऑक्साइड निकालती है, और उसमें ऑक्सीजन भरकर वापस शरीर में पंप करती है. डॉक्टर लू के मुताबिक, जहां सामान्य CPR से बचने की संभावना केवल 1 प्रतिशत होती है, वहीं ECMO इसे बढ़कर 50 फीसदी तक कर देती है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों के लिए यह आसान नहीं था. 40 घंटे तक दिल बंद रहने के दौरान कई खतरे थे. लंबे समय तक मशीन पर रहने से खून जमने का डर रहता है, जो जानलेवा हो सकता है. इसे रोकने वाली दवाओं और ब्लीडिंग के बीच संतुलन बनाना डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. इस प्रकिया में स्ट्रोक, किडनी फेल्योर का जोखिम बना रहता है. ये भी पढ़ें: Viral Video: टॉफी के लिए भाई की कनपटी पर तानी टॉयगन, नन्हीं ‘डॉन’ के आगे मम्मी ने टेके घुटने, वीडियो देख लोटपोट हुए लोग
इलाज के खर्च पर छिड़ी बहसजैसे ही यह खबर चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैली, नेटिजन्स के बीच इलाज के खर्च को लेकर एक नई बहस छिड़ गई. जानकारी के अनुसार, ECMO मशीन के शुरू करने की लागत लगभग 50,000 युआन (लगभग 7 लाख रुपये) है. इसके बाद दिन का खर्च 10,000 युआन (लगभग 1.4 लाख रुपये) से अधिक होता है. चीन में यह तकनीक मेडिकल इंश्योरेंस में कवर नहीं होती, जिससे आम आदमी के लिए यह इलाज पहुंच से बाहर हो जाता है. ये भी पढ़ें: Viral Video: ‘स्कूलिये तूर देब’…मास्साब को धमकाते इस छोटे ‘डॉन’ का वीडियो देख छूट जाएगी हंसी!
डॉ. लू का कहना है यह बेहतरीन मेडिकल तकनीक है. हर सफल इलाज चिकित्सा विकास और भाग्य का मिला-जुला परिणाम होता है. उन्होंने कहा, यह डॉक्टरों की मेहनत और मरीज की किस्मत का एक दुर्लभ मेल था. मरीज 20 दिनों के इलाज के बाद अपने पैरों पर चलकर हॉस्पिटल से बाहर निकला. ये भी पढ़ें: Viral Video: स्कूल से बैग में भरकर ये क्या ले आई बेटी? देखते ही पिता की निकल गई चीख